कर्नाटक: वनकर्मियों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, चामराजनगर मुठभेड़ में 3 शिकारियों की मौत पर सरकार का जवाब
कर्नाटक के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में हुई एक मुठभेड़ में तीन कथित शिकारियों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा है। विधानसभा में सोमवार को वन और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने…
कर्नाटक के चामराजनगर रिजर्व फॉरेस्ट में हुई एक मुठभेड़ में तीन कथित शिकारियों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा है। विधानसभा में सोमवार को वन और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि वनकर्मियों ने शिकारियों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह घटना 14-15 अगस्त की दरमियानी रात कावेरी वन्यजीव अभ्यारण्य में हुई।
मंत्री रेड्डी ने भाजपा नेताओं के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि गोलीबारी के पीछे कोई गलत इरादा नहीं था और वन अधिकारियों को अपनी जान बचाने के लिए हथियार इस्तेमाल करने का अधिकार है। उन्होंने सदन को बताया कि सरकार इस घटना पर विस्तृत बयान देने को तैयार है।
तलाशी अभियान और मुठभेड़ का पूरा घटनाक्रम
यह ऑपरेशन 14 अगस्त की रात करीब 8 बजे शुरू हुआ था। वन विभाग को सूचना मिली थी कि हथियारबंद शिकारी कावेरी वाइल्डलाइफ रिजर्व के हनूर सब-डिविजन के शाग्या इलाके में घुस गए हैं। इसके बाद विभाग ने दो टीमें बनाकर तलाशी अभियान शुरू किया।
अगले दिन, यानी 15 अगस्त की सुबह लगभग 5 बजे, टीमों को जंगल में कराडिकल्लू इलाके में टॉर्च की रोशनी दिखी। जब वनकर्मी उस ओर बढ़े, तो उन्होंने पाया कि शिकारी बड़ी चट्टानों के पीछे छिपे हुए थे और उन्होंने वनकर्मियों पर गोली चलाना शुरू कर दिया। रेड्डी के मुताबिक, शिकारी ऊंची जगह पर थे और लगातार फायरिंग कर रहे थे, जिसके जवाब में कर्मियों को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी।
सरकार का पक्ष और बरामदगी
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा, "कर्मियों ने अपनी जान बचाने के इरादे से गोली चलाई। गोलियां शिकारियों के कमर के ऊपर लगीं। वन कर्मियों का कोई गलत इरादा नहीं था।" उन्होंने यह भी बताया कि घायलों की चीखें सुनकर जब वनकर्मी उनके पास पहुँचे तो तीन लोग ज़मीन पर पड़े मिले। उन्हें तुरंत कोल्लेगल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ तीनों की मौत हो गई।
मंत्री ने बताया कि ये तीनों लोग रिजर्व फॉरेस्ट में करीब आठ किलोमीटर अंदर तक गए थे। उनके पास जंगल में घुसने की इजाजत नहीं थी। उन्होंने परिवारों के इस दावे को खारिज कर दिया कि वे मवेशियों की तलाश में गए थे, क्योंकि उस इलाके में कोई मृत मवेशी नहीं मिला। मौके से करीब 34.5 किलोग्राम संदिग्ध जंगली जानवर का मांस बरामद किया गया।
विपक्ष के सवाल और परिवारों का दावा
इस घटना में मारे गए शिकारी अलग-अलग गाँवों के रहने वाले थे। महिमा दास नामक एक अन्य कथित शिकारी मौके से भागने में कामयाब रहा। मुठभेड़ में लगभग 10 वनकर्मियों को भी चोटें आई हैं, जिनका इलाज किया गया। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।
वहीं, विपक्ष के नेता आर अशोक ने सरकार के बयान पर सवाल उठाते हुए मौतों के लिए जवाबदेही की मांग की है। दूसरी ओर, मारे गए लोगों के परिवारों ने विभाग के इस दावे को चुनौती दी है कि वे आदतन शिकारी थे। परिवारों का आरोप है कि वे किसान थे और शिकार के लिए नहीं, बल्कि अन्य कारणों से जंगल गए थे।
इनपुट: IANS



