विधायकों के 'फर्जी हस्ताक्षर' मामला: अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत 30 नवंबर तक बढ़ी
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पुलिस की किसी भी कठोर कार्रवाई…
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पुलिस की किसी भी कठोर कार्रवाई से उन्हें मिली सुरक्षा को 30 नवंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। यह मामला एक सरकारी दस्तावेज़ पर कई विधायकों के जाली दस्तखत के आरोपों से जुड़ा है, जिसकी जांच पश्चिम बंगाल पुलिस का अपराध अनुसंधान विभाग (CID) कर रहा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को जांच की प्रगति से अवगत कराया।
जांच में क्या सामने आया?
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने पीठ को बताया कि फोरेंसिक जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि जिस दस्तावेज़ पर विवाद है, उस पर कुल 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे। इनमें से पांच विधायकों ने अपने हस्ताक्षर जाली होने की शिकायत की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि इन पांच में से तीन विधायकों के हस्ताक्षर वाकई में जाली थे।
राजदीप मजूमदार ने यह भी दलील दी कि यह कथित जालसाजी अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी में हुई थी। उन्होंने तारीखों में विसंगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "6 मई को कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। फिर भी यह लिखा गया कि उस दिन प्रस्ताव पारित किया गया था। उस दिन विधायकों से प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए भी नहीं कहा गया था। असल में इस पर 19 मई को हस्ताक्षर किए गए थे।"
अदालत का अवलोकन
अभियोजन पक्ष की दलीलों के बावजूद, अदालत ने कहा कि पहली नजर में ऐसा नहीं लगता कि अभिषेक बनर्जी 'फर्जी हस्ताक्षर' में शामिल थे। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें दी गई अंतरिम सुरक्षा की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया। यह मामला विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक दस्तावेज़ से जुड़ा है, जिसे 6 मई की तारीख वाले जनरल सेक्रेटरी के पैड पर भेजा गया था, जिसके बाद पांच विधायकों ने जालसाजी का आरोप लगाया था।
इनपुट: IANS



