शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक विधान परिषद: सभापति होरट्टी के इस्तीफे पर असमंजस, कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में

कर्नाटक की राजनीति में विधान परिषद के सभापति पद को लेकर गतिरोध बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात के बाद सभापति बसवराज होरट्टी नाराज़ दिखे, जिसके बाद कांग्रेस सरकार अब उनके खिलाफ अविश्वास…

कर्नाटक विधान परिषद: सभापति होरट्टी के इस्तीफे पर असमंजस, कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में
(फोटो: IANS)

कर्नाटक की राजनीति में विधान परिषद के सभापति पद को लेकर गतिरोध बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात के बाद सभापति बसवराज होरट्टी नाराज़ दिखे, जिसके बाद कांग्रेस सरकार अब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम शुक्रवार को मुख्यमंत्री से होरट्टी की मुलाकात के बाद तेज हो गया।

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पहले होरट्टी ने 14 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी, लेकिन अब माना जा रहा है कि उन्होंने पद छोड़ने के लिए और समय मांगा है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पर बैठक के बाद होरट्टी स्पष्ट रूप से नाखुश नजर आए। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैंने जो कुछ दिन पहले कहा था, मैं उस पर कायम हूं। अगर वे अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं, तो ला सकते हैं। वे कानून के मुताबिक आगे बढ़ सकते हैं।"

कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव

सूत्रों के मुताबिक, होरट्टी के इस्तीफे पर स्पष्ट आश्वासन न मिलने के कारण कांग्रेस ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस एमएलसी इवान डिसूजा इस प्रस्ताव के लिए नोटिस तैयार कर रहे हैं। सत्ताधारी दल को यह भी चिंता है कि होरट्टी ने सभापति के तौर पर अहम फैसले लेने से पहले भाजपा नेताओं से सलाह ली, जो एक पक्षपातपूर्ण रवैया है।

कांग्रेस पहले ही वरिष्ठ नेता सलीम अहमद को इस पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, जिससे यह विवाद और बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि जब सभापति का पद भरा हुआ है, तो उस पर किसी उम्मीदवार की घोषणा करना परंपरा के विरुद्ध है। भाजपा का कहना है कि यह एक संवैधानिक पद है और इसका सम्मान पार्टी की राजनीति से ऊपर होना चाहिए।

'संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस'

इन राजनीतिक développements पर बसवराज होरट्टी ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "किसी संवैधानिक पद का अनादर करना या उस पर कब्जा करना सही नहीं है।" होरट्टी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनसे कहा था कि यह हाईकमान का आदेश है, इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा, "मुझ पर भरोसा न जताने वाली बातों से मुझे बहुत दुख पहुंचा है। मैं ऐसे माहौल में काम जारी नहीं रखना चाहता और इसीलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है।" होरट्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि पद से इस्तीफा देने के बाद भी वे एक सामान्य सदस्य के रूप में विधान परिषद की कार्यवाही में हिस्सा लेते रहेंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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