स्वास्थ्य सेवा में भारत को अब अगले स्तर पर जाने की ज़रूरत: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने देश की स्वास्थ्य सेवा को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने रखा है। उनका मानना है कि भारत प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक (Tertiary) स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने…
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने देश की स्वास्थ्य सेवा को लेकर एक बड़ा दृष्टिकोण सामने रखा है। उनका मानना है कि भारत प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक (Tertiary) स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर बनाने में तो सफल रहा है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि हम चतुर्थक यानी क्वाटरनरी-लेवल (Quaternary-level) इलाज की ओर बढ़ें। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, श्रीनगर में 'क्वाटरनरी हेल्थकेयर और रिसर्च समिट' को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया।
उपराज्यपाल ने कहा कि उन्नत स्वास्थ्य सेवा अब सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने इस कार्यक्रम को जम्मू-कश्मीर और भारत की स्वास्थ्य सेवा यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया, जिसका लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए उन्नत इलाज और अनुसंधान सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य ढांचे में हुई प्रगति
उपराज्यपाल सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की स्वास्थ्य सेवा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कुछ प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें 56 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिए मुफ्त इलाज, हर साल 7 करोड़ बच्चों का टीकाकरण और ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन के ज़रिए 37 करोड़ लोगों को मिली देखभाल शामिल है।
बुनियादी ढांचे के विस्तार पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि देश में 23 एम्स और 2,045 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर भी प्रकाश डाला, जिसमें 2 एम्स, 10 मेडिकल कॉलेज, 2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और कई अन्य नर्सिंग, पैरामेडिकल और फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं।
भविष्य का रोडमैप: क्वाटरनरी केयर
मनोज सिन्हा ने भविष्य की दिशा तय करते हुए अस्पतालों से आग्रह किया कि वे केवल इलाज तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे शोध संस्थानों में बदलें जहाँ अंग प्रत्यारोपण, रोबोटिक सर्जरी, एडवांस्ड जीनोमिक्स, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निदान जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हों। उन्होंने अस्पतालों को आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर और प्रोटॉन-बीम थेरेपी जैसी विशेष सुविधाओं के लिए सालाना बजट आवंटित करने को कहा।
अपने संबोधन में उन्होंने 2020 के 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम का भी ज़िक्र किया, जब अखनूर में डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारियों का पता लगाने के लिए आधुनिक उपकरणों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था। सिन्हा ने कहा कि यह घटना छोटे ज़िला अस्पतालों और असल ज़रूरतों के बीच के अंतर को दिखाती है, जिसे पाटना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने ज़िला अस्पतालों को सीधे क्वाटरनरी-केयर संस्थानों से जोड़ने के लिए टेलीमेडिसिन और AI आधारित एक नया कॉरिडोर बनाने का भी सुझाव दिया।
इनपुट: IANS



