शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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जापान बना भारत के GCC इकोसिस्टम का सबसे बड़ा APAC भागीदार, 100 से ज़्यादा सेंटर स्थापित

भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी अब ज़मीनी स्तर पर बड़े आर्थिक बदलाव ला रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान अब एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में भारत के ग्लोबल कैपेबिलि

जापान बना भारत के GCC इकोसिस्टम का सबसे बड़ा APAC भागीदार, 100 से ज़्यादा सेंटर स्थापित
(फोटो: IANS)

भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी अब ज़मीनी स्तर पर बड़े आर्थिक बदलाव ला रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान अब एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र में भारत के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम का सबसे बड़ा भागीदार बन गया है। जापानी कंपनियों ने भारत में 100 से अधिक जीसीसी स्थापित कर लिए हैं, जो अब केवल बैक-ऑफ़िस का काम नहीं, बल्कि इनोवेशन और इंजीनियरिंग के महत्वपूर्ण केंद्र बन रहे हैं।

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शुक्रवार को जारी डेलॉइट इंडिया की रिपोर्ट "इंडियाज स्ट्रेटेजिक जीसीसी प्ले फॉर जापानीज इंटरप्राइजेज" में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जापानी कंपनियाँ भारत में अपने जीसीसी नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार कर रही हैं ताकि इनोवेशन-आधारित और क्षमता-केंद्रित विकास को गति दी जा सके।

तकनीक और इंजीनियरिंग पर विशेष ध्यान

भारत में स्थापित ये जापानी जीसीसी मुख्य रूप से इंजीनियरिंग से जुड़े उद्योगों पर केंद्रित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें टेक्नोलॉजी क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा 20 प्रतिशत है। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र (15 प्रतिशत) और ऑटोमोबाइल व हेल्थकेयर सेक्टर (प्रत्येक 11 प्रतिशत) का स्थान है। ये सेंटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड एनालिटिक्स, एम्बेडेड सिस्टम और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

भारत क्यों है पसंदीदा?

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर और जीसीसी इंडस्ट्री लीडर रोहन लोबो के अनुसार, "जैसे-जैसे जापानी कंपनियां अपने वैश्विक क्षमता नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, भारत उनके लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।" उन्होंने बताया कि भारत में बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग प्रतिभा की उपलब्धता, डिजिटल विशेषज्ञता और काम की प्रतिस्पर्धी लागत इसे जापानी कंपनियों के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बनाती है।

डेलॉइट इंडिया के एक अन्य पार्टनर कीर्ति कुमार ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में जापानी जीसीसी का फोकस इंजीनियरिंग आधारित उद्योगों पर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब डॉलर) के निवेश की प्रतिबद्धता और डिजिटल साझेदारी जैसे कार्यक्रम इस विस्तार को और बढ़ावा दे रहे हैं।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य का विस्तार

इस बढ़ते सहयोग का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है। रोहन लोबो ने बताया कि डिजिटल और इंजीनियरिंग कार्यों के विस्तार से भारत का जीसीसी क्षेत्र वित्त वर्ष 2030 तक 470 से 600 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पैदा कर सकता है। यह देश की जीडीपी में 2.8 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है और लाखों उच्च-कुशल रोज़गार पैदा कर सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि जीसीसी का यह विस्तार अब सिर्फ़ महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद, जयपुर, कोयंबटूर, कोच्चि और इंदौर जैसे शहर भी जीसीसी निवेश के नए केंद्र बन रहे हैं। इन शहरों में कम लागत, विशेष कौशल वाले प्रतिभा पूल और राज्य सरकारों की उद्योग-समर्थक नीतियां इस बदलाव को गति दे रही हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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