जयपुर ग्रामीण लोकसभा चुनाव: रद्द पोस्टल बैलेट के आंकड़ों में अंतर ने बढ़ाई चुनाव आयोग की मुश्किलें, हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर 2024 के चुनाव नतीजों को लेकर चल रहे विवाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें आयोग ने खुद को इस…
जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर 2024 के चुनाव नतीजों को लेकर चल रहे विवाद में राजस्थान हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें आयोग ने खुद को इस मामले से एक पक्षकार के तौर पर हटाने की मांग की थी। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रद्द किए गए पोस्टल बैलेट की संख्या और जीत के अंतर को देखते हुए आयोग इस मामले में एक "जरूरी पक्ष" है।
यह मामला कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चोपड़ा की याचिका से जुड़ा है, जिन्होंने भाजपा के राव राजेंद्र सिंह के हाथों मात्र 1,615 वोटों से अपनी हार को चुनौती दी है। चोपड़ा ने वोटों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, खासकर पोस्टल बैलेट को लेकर, और इसी आधार पर उन्होंने अदालत का रुख किया था।
क्यों अहम है चुनाव आयोग की भूमिका?
जस्टिस विनोद कुमार भरवानी की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि जीत का अंतर (1,615 वोट) रद्द किए गए पोस्टल बैलेट की संख्या से कम था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि 4 जून को मतगणना वाले दिन रिटर्निंग ऑफिसर ने याचिकाकर्ता को बताया था कि 1,225 पोस्टल बैलेट रद्द हुए हैं। हालांकि, बाद में RTI के जरिए मिली जानकारी में यह संख्या 2,738 बताई गई।
अदालत ने कहा कि चूंकि ये दोनों अलग-अलग आंकड़े एक ही दिन के लिए चुनाव आयोग द्वारा ही दिए गए थे, यही उम्मीदवारों के बीच विवाद की मुख्य वजह है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, जिला चुनाव अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी मामले में पक्षकार बने रहेंगे।
दोनों पक्षों की दलीलें
चुनाव आयोग ने अपनी अर्जी में 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि उसे चुनाव याचिका में पक्ष नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि यह विवाद पूरी तरह से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के बीच का है।
इसके विपरीत, कांग्रेस उम्मीदवार अनिल चोपड़ा के वकील ने इसका विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि जब जीत का अंतर रद्द किए गए वोटों से कम हो, तो इन आंकड़ों में भिन्नता को स्पष्ट करने में आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। याचिकाकर्ता ने नतीजों को चुनौती देने के लिए रद्द पोस्टल बैलेट से जुड़े इन्हीं अलग-अलग आंकड़ों को अपना मुख्य आधार बनाया है।
इनपुट: IANS



