शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय रियल एस्टेट में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, 6 महीने में आया 4.5 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने इस साल की पहली छमाही (जनवरी-जून) में जमकर पैसा लगाया है। तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, इस दौरान सेक्टर में कुल 4.5 अरब डॉलर का निवेश आया, जो प

भारतीय रियल एस्टेट में निवेशकों का भरोसा बढ़ा, 6 महीने में आया 4.5 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश
(फोटो: IANS)

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने इस साल की पहली छमाही (जनवरी-जून) में जमकर पैसा लगाया है। तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, इस दौरान सेक्टर में कुल 4.5 अरब डॉलर का निवेश आया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 50% ज़्यादा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले छह सालों में किसी भी साल की पहली छमाही का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।

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रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कोलियर्स द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि इस उछाल में घरेलू निवेशकों की भूमिका सबसे अहम रही है। साल के पहले छह महीनों में हुए कुल निवेश में से 57% हिस्सा, यानी करीब 2.6 अरब डॉलर, भारतीय निवेशकों ने ही लगाया। वहीं, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी अपना निवेश सालाना आधार पर 24% बढ़ाकर 1.9 अरब डॉलर कर दिया है।

किस सेक्टर में आया सबसे ज़्यादा पैसा?

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफिस प्रॉपर्टीज़ निवेशकों की पहली पसंद बनी रहीं, जहाँ ज़्यादातर घरेलू निवेशकों ने पहले से चालू संपत्तियों में निवेश किया। इसके अलावा, मिक्स्ड-यूज़ (एक ही प्रोजेक्ट में कई तरह के इस्तेमाल) और वैकल्पिक संपत्तियों, दोनों में लगभग 0.8-0.8 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो कुल निवेश का लगभग पांचवां हिस्सा है। होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 0.3 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना से भी ज़्यादा है।

आवासीय क्षेत्र में घटी दिलचस्पी

इसके ठीक उलट, आवासीय यानी रिहायशी सेक्टर में संस्थागत निवेश में बड़ी गिरावट देखी गई। बढ़ती लागत और घरों की बिक्री में कमी को देखते हुए निवेशक इस सेगमेंट में सतर्कता बरत रहे हैं। नतीजतन, इस क्षेत्र में निवेश सालाना आधार पर 43% घटकर महज़ 0.5 अरब डॉलर रह गया।

छोटे शहरों और मल्टी-सिटी सौदों का बोलबाला

कोलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक ने कहा, "पिछले कुछ तिमाहियों से संस्थागत निवेश में घरेलू निवेशकों का योगदान लगातार 60 प्रतिशत तक रहा है, जबकि विदेशी निवेशक अब अधिक सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं और पारंपरिक रियल एस्टेट एसेट्स से हटकर दूसरे क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रहे हैं।"

इलाकों के हिसाब से देखें तो चेन्नई और बेंगलुरु कुल निवेश का 27% (लगभग 1.2 अरब डॉलर) हिस्सा लेकर सबसे आगे रहे। हालांकि, सबसे बड़ी हिस्सेदारी (46%) मल्टी-सिटी सौदों की रही, जहाँ एक ही सौदे में कई शहरों की प्रॉपर्टीज़ शामिल थीं। इसके अलावा, टियर-II और टियर-III शहरों में भी हॉस्पिटैलिटी, इंडस्ट्रियल और रिहायशी प्रोजेक्ट्स में काफी निवेश देखा गया।

इनपुट: IANS

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