मैन्युफैक्चरिंग और निवेश में तेज़ी, जुलाई में भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा
भारत की औद्योगिक विकास दर ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जुलाई 2026 में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 6.7 प्रतिशत की…
भारत की औद्योगिक विकास दर ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जुलाई 2026 में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 6.7 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल मुख्य रूप से विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में आई मजबूती के कारण है, जो अर्थव्यवस्था में निवेश की गतिविधियों के बेहतर होने का संकेत देता है।
जुलाई के आँकड़ों से पता चलता है कि यह वृद्धि काफी व्यापक रही। विनिर्माण क्षेत्र, जो औद्योगिक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है, 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा। वहीं, बिजली और गैस आपूर्ति क्षेत्र में 8.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखने को मिली। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि चालू वित्त वर्ष में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की औद्योगिक गतिविधियाँ काफी हद तक मजबूत बनी हुई हैं।
निवेश और उत्पादन में उछाल
आँकड़ों का सबसे उत्साहजनक पहलू निवेश से जुड़ी गतिविधियों में तेज़ी है। पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) के उत्पादन में 16.1 प्रतिशत और बुनियादी ढांचा व निर्माण से जुड़ी वस्तुओं में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह के मुताबिक, ये आँकड़े स्पष्ट रूप से निवेश-आधारित विकास को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediate goods) में 10 प्रतिशत और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (consumer durables) में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि उद्योग अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं।
किन उद्योगों का रहा दबदबा?
विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 19 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जिसने इस क्षेत्र के व्यापक विस्तार को रेखांकित किया है। इनमें विद्युत उपकरण, मोटर वाहन, अन्य परिवहन उपकरण, और मशीनरी निर्माण जैसे क्षेत्र सबसे आगे रहे। उत्पाद स्तर पर स्विचगियर, ऑटो कंपोनेंट्स, यात्री वाहन, निर्माण मशीनरी और पंप जैसे उत्पादों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि देखी गई। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च प्रमुख राजीव शरण ने कहा कि वाहन और घरेलू उपकरणों जैसी टिकाऊ वस्तुओं की मांग में मजबूती शहरी मांग और उपभोक्ता विश्वास में सुधार का संकेत देती है।
कुछ चिंताएँ और भविष्य की राह
सकारात्मक तस्वीर के बीच कुछ चिंताएँ भी मौजूद हैं। उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं (consumer non-durables) यानी रोज़मर्रा के इस्तेमाल की चीज़ों के उत्पादन में 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है। यह ग्रामीण या निम्न-आय वर्ग की मांग में कुछ नरमी का संकेत हो सकता है। रजनी सिन्हा ने आगाह किया कि आने वाले समय में मुद्रास्फीति, मौसम संबंधी व्यवधान और ग्रामीण मांग पर इनके प्रभाव पर नजर रखनी होगी। वहीं, शाश्वत सिंह ने कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं को भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बताया।
इनपुट: IANS



