बुधवार, 9 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत में औद्योगिक ज़मीन की लीज़िंग में ज़बरदस्त तेज़ी, 2030 तक 40% हिस्सेदारी का अनुमान

भारत के औद्योगिक रियल एस्टेट बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियाँ तेज़ी से जगह लीज़ पर ले रही हैं। कमर्शियल रियल एस्टेट सेवा कंपनी JLL की…

भारत में औद्योगिक ज़मीन की लीज़िंग में ज़बरदस्त तेज़ी, 2030 तक 40% हिस्सेदारी का अनुमान
(फोटो: IANS)

भारत के औद्योगिक रियल एस्टेट बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियाँ तेज़ी से जगह लीज़ पर ले रही हैं। कमर्शियल रियल एस्टेट सेवा कंपनी JLL की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से इस क्षेत्र में 49 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की गई है। इस दौरान कुल 6.9 करोड़ वर्ग फुट औद्योगिक जगह लीज़ पर दी गई, जो देश में बढ़ती विनिर्माण गतिविधियों का सीधा संकेत है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान इतना मज़बूत है कि विनिर्माण क्षेत्र अब थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) के बाद औद्योगिक संपत्तियों का दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन गया है। अनुमान है कि 2030 तक औद्योगिक रियल एस्टेट बाज़ार में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी। यह भारत के एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

टियर-1 और टियर-2 शहरों में अलग रणनीति

JLL इंडिया के औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स कारोबार के प्रबंध निदेशक योगेश शेवाड़े ने बताया कि इस विस्तार के पीछे दोहरी रणनीति काम कर रही है। बड़े यानी टियर-1 शहरों में कंपनियाँ बाज़ार तक तेज़ी से पहुँचने और शुरुआती लागत कम रखने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली 'ग्रेड-ए' औद्योगिक संपत्तियों को लीज़ पर लेना पसंद कर रही हैं। वहीं, लखनऊ, जयपुर, सूरत और नागपुर जैसे 14 उभरते टियर-2 शहरों में कंपनियाँ लंबी अवधि के नियंत्रण और अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदलाव करने के लिए ज़मीन खरीदने को प्राथमिकता दे रही हैं।

गुणवत्ता और आधुनिक सुविधाओं पर ज़ोर

आँकड़े बताते हैं कि 2023 में कुल मैन्युफैक्चरिंग लीज़िंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए संपत्तियों में था। इससे साफ़ है कि अब कंपनियाँ बेहतर सुरक्षा मानकों, स्वच्छता प्रोटोकॉल और आधुनिक सुविधाओं वाले औद्योगिक परिसरों को चुन रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2023 में कुल लीज़िंग 1.92 करोड़ वर्ग फुट थी, जबकि 2024 की पहली छमाही में ही यह 1.02 करोड़ वर्ग फुट पहुँच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 19 प्रतिशत अधिक है।

योगेश शेवाड़े के अनुसार, चाहे कंपनियाँ लीज़िंग का रास्ता चुनें या ज़मीन खरीदें, दोनों ही मॉडल यह दिखाते हैं कि वैश्विक और घरेलू निर्माता भारत को अपने उत्पादन केंद्र के रूप में तेज़ी से अपना रहे हैं। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2030 तक मैन्युफैक्चरिंग लीज़िंग का आँकड़ा हर साल लगभग 4.6 करोड़ वर्ग फुट तक पहुँच सकता है।

इनपुट: IANS

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