शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, 785 अरब डॉलर के पार पहुंचा

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत देते हुए देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) एक नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 4…

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर, 785 अरब डॉलर के पार पहुंचा
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत देते हुए देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) एक नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में यह 44.90 अरब डॉलर की भारी बढ़ोतरी के साथ 785.71 अरब डॉलर हो गया।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारत के इतिहास में विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह लगातार दूसरा हफ्ता है जब भंडार में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे ठीक पहले 28 अगस्त को समाप्त हुए सप्ताह में भी इसमें 11.47 अरब डॉलर का इजाफा हुआ था। इस तरह, सिर्फ दो हफ्तों में भारत के खजाने में 56 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम जुड़ी है।

इस उछाल की वजह क्या है?

विदेशी मुद्रा भंडार में इस जबरदस्त उछाल का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets - FCA) में हुई तेज बढ़ोतरी है। समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान FCA 47.498 अरब डॉलर बढ़कर 648.17 अरब डॉलर पर पहुंच गया। FCA, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, जिसमें डॉलर, यूरो जैसी विदेशी मुद्राएं शामिल होती हैं।

हालांकि, इसी अवधि में भारत के स्वर्ण भंडार (Gold Reserve) में थोड़ी कमी आई। RBI के अनुसार, सोने का भंडार 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया। इसके बावजूद, पिछले साल की तुलना में यह अभी भी 23.517 अरब डॉलर अधिक है।

अन्य घटकों की स्थिति

RBI के आंकड़ों से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत के विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 40 लाख डॉलर की मामूली गिरावट आई और यह 18.806 अरब डॉलर पर आ गया। वहीं, IMF में भारत की आरक्षित स्थिति 20 लाख डॉलर बढ़कर 4.916 अरब डॉलर हो गई।

कुल मिलाकर, इस साल मार्च के अंत से अब तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 94.599 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भंडार का यह रिकॉर्ड स्तर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिससे रुपये को स्थिर रखने और बाहरी झटकों से निपटने में मदद मिलेगी।

इनपुट: IANS

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