इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में भारत की ऊंची छलांग, 13 लाख करोड़ रु के पार पहुंचा आंकड़ा
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन…
भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के 11.32 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 15.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है।
बुधवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी ज़बरदस्त उछाल आया है। यह 11 गुना बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जो भारत की बढ़ती उत्पादन और निर्यात क्षमता का स्पष्ट संकेत है।
रोजगार और महिला सशक्तीकरण
इस सेक्टर का विकास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा कर रहा है। जितिन प्रसाद के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है। इसमें भी अकेले मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम ने अपनी पूरी वैल्यू चेन में करीब 12 लाख लोगों को रोजगार दिया है।
यह उद्योग महिला सशक्तीकरण का भी एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। मंत्री ने बताया कि मोबाइल फोन निर्माण के कुछ बेहद सटीक काम (हाई-प्रिसीजन सेगमेंट) वाले हिस्सों में कुल कार्यबल का लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो इसे लैंगिक समावेशी औद्योगिक विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बनाता है।
स्मार्टफोन बना सबसे बड़ा निर्यातक उत्पाद
एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया कि स्मार्टफोन, जो 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी शामिल नहीं थे, अब देश का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन गए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में स्मार्टफोन ने पेट्रोलियम, रत्न और आभूषण जैसे पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को भी पीछे छोड़ दिया है। आज भारत में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही बनाए जा रहे हैं और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।
सरकारी योजनाओं का असर
इस वृद्धि के पीछे सरकार की नीतियों और योजनाओं का बड़ा योगदान रहा है। जितिन प्रसाद ने बताया कि मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने देश में अब तक लगभग 96,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। इसी तरह, 2023 में शुरू की गई आईटी हार्डवेयर के लिए PLI स्कीम 2.0 का उद्देश्य लैपटॉप और सर्वर जैसे उत्पादों का घरेलू विनिर्माण बढ़ाना है, जिसके तहत अब तक 24,385 करोड़ रुपए का उत्पादन और 5,216 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत भी 75 आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनसे 61,671 करोड़ रुपए का निवेश आने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



