गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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अगले 10 साल में दोगुनी हो सकती है भारत की अर्थव्यवस्था, 8 ट्रिलियन डॉलर के पार जाने का अनुमान

भारत की अर्थव्यवस्था अगले एक दशक के भीतर दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की हो सकती है। वैश्विक निवेश फर्म केकेआर (KKR) की एक नई रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भार…

अगले 10 साल में दोगुनी हो सकती है भारत की अर्थव्यवस्था, 8 ट्रिलियन डॉलर के पार जाने का अनुमान
(फोटो: IANS)

भारत की अर्थव्यवस्था अगले एक दशक के भीतर दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की हो सकती है। वैश्विक निवेश फर्म केकेआर (KKR) की एक नई रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुका है और मौजूदा आर्थिक गति को देखते हुए यह अगले 10 वर्षों में अपने आकार को दोगुना करने की राह पर है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक धैर्यपूर्वक लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट कहती है, "भारत इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण है कि धैर्यपूर्वक किए गए संरचनात्मक सुधार तिमाही नहीं, बल्कि पूरे दशक में कितना बड़ा बदलाव ला सकते हैं।"

विकास की नींव बने प्रमुख सुधार

केकेआर का मानना है कि 2014 के बाद लागू किए गए कई बड़े आर्थिक सुधारों ने देश की विकास क्षमता को मजबूत किया है। इनमें वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), श्रम बाजार का औपचारिककरण, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे में भारी निवेश प्रमुख हैं। फर्म के अनुसार, ये सुधार भारत को लगभग 11 प्रतिशत की नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

अभी और संभावनाएं बाकी

रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि पहले से लागू कई सुधारों का पूरा फायदा अभी अर्थव्यवस्था को मिलना बाकी है। इसका मतलब है कि भारत की विकास गाथा अपने अंतिम चरण में नहीं है, बल्कि इसमें आगे भी महत्वपूर्ण संभावनाएं मौजूद हैं। अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने से भारतीय कारोबारों और नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) से जुड़ा जोखिम कम हुआ है, जिससे लंबी अवधि के निवेश के लिए बेहतर माहौल बना है।

सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र की भूमिका

केकेआर की रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि में आधे से अधिक का योगदानकर्ता बताया गया है, जिसकी भूमिका आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की उम्मीद है। इसी के साथ, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) को भी आर्थिक विकास के नए इंजन के रूप में पहचाना गया है। प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारतीय आईटी सेवा उद्योग के लिए कोई खतरा नहीं, बल्कि एक नया अवसर है। भारतीय आईटी कंपनियां अपनी सेवाओं में AI का इस्तेमाल बढ़ाकर उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों में सुधार कर सकती हैं।

इनपुट: IANS

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