GST सुधारों का अगला दौर: कारोबारियों के लिए रिटर्न फाइलिंग, रिफंड और रजिस्ट्रेशन हो सकता है आसान
गुरुवार को नई दिल्ली में होने वाली 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में देश के कारोबारियों के लिए टैक्स अनुपालन को और सरल बनाने पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की…
गुरुवार को नई दिल्ली में होने वाली 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में देश के कारोबारियों के लिए टैक्स अनुपालन को और सरल बनाने पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रियागत सुधारों को लागू करना है, जिससे रजिस्ट्रेशन से लेकर रिफंड तक की प्रक्रिया आसान हो सके।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पहले यह बैठक बुधवार को होनी थी, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इससे पहले 12 सितंबर को भी यह बैठक प्रस्तावित थी, जिसे भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण स्थगित करना पड़ा था।
क्या-क्या बदलाव संभव हैं?
सूत्रों के अनुसार, बैठक में जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी की सिफारिशों पर खास तौर पर विचार किया जाएगा। इन सिफारिशों का लक्ष्य टैक्सपेयर्स और व्यवसायों के लिए अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में ये शामिल हो सकते हैं:
- रजिस्ट्रेशन और रिटर्न फाइलिंग: इन प्रक्रियाओं को और सुगम बनाने के प्रस्तावों पर चर्चा होगी।
- रिफंड और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): रिफंड प्रक्रिया में सुधार और आईटीसी से जुड़े नियमों को सरल बनाने पर जोर दिया जाएगा।
- विवाद निपटान: विवादों के समाधान के लिए एक बेहतर व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, दोनों ही हाल में यह संकेत दे चुके हैं कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण का फोकस प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर होगा, ताकि उद्योगों का भरोसा बढ़े और वे निवेश व विस्तार के लिए प्रोत्साहित हों।
कर चोरी के मामलों में नरमी के संकेत
बैठक में लॉ कमेटी की एक महत्वपूर्ण सिफारिश पर भी चर्चा होनी है। समिति ने सुझाव दिया है कि जानबूझकर की गई कर चोरी और अनजाने में हुई गलती (जैसे टैक्स भुगतान में कमी या देरी) के बीच फर्क किया जाना चाहिए।
मौजूदा नियमों के तहत, सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 आयुक्त को यह अधिकार देती है कि अगर उन्हें लगता है कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध (जैसे टैक्स चोरी या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट) किया है, तो वे उसकी गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं। बैठक में ई-कॉमर्स और छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान बनाने के उपायों पर भी मंथन होने की संभावना है।
इनपुट: IANS



