भारतीय शेयर बाज़ार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, वैश्विक दबाव और RBI की नीति का असर
कमज़ोर वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार दूसरे दिन गिरावट का दौर देखने को मिला। मंगलवार को बाज़ार सपाट खुलने के बाद जल्द ही दबाव में आ गया और…
कमज़ोर वैश्विक संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार दूसरे दिन गिरावट का दौर देखने को मिला। मंगलवार को बाज़ार सपाट खुलने के बाद जल्द ही दबाव में आ गया और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों ही लाल निशान में फिसल गए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशक भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति के असर का आकलन कर रहे हैं, जिसका प्रभाव बाज़ार की धारणा पर पड़ रहा है।
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 72,668 पर खुला और 29.30 अंकों की मामूली बढ़त दिखाई। लेकिन जल्द ही यह बढ़त गँवाकर 492 अंक (0.67%) तक टूट गया और 72,175.95 के दिन के निचले स्तर पर पहुँच गया। इसी तरह, निफ्टी 50 भी 22,599.05 पर लगभग सपाट खुला, पर बाद में 153.35 अंक (0.67%) गिरकर 22,445.70 के इंट्रा-डे लो पर आ गया।
किन सेक्टर्स में रही तेज़ी और मंदी?
इस गिरावट के दौर में भी कुछ सेक्टर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी, निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा सूचकांकों में 0.59% तक की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टर में भी हल्की मज़बूती दिखी। इसके विपरीत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (एक्स-बैंक) और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 0.38% तक की गिरावट के साथ सबसे ज़्यादा दबाव में रहे। ऑटो शेयरों में भी कमज़ोरी का माहौल बना रहा।
बाज़ार पर दबाव की मुख्य वजहें
विश्लेषकों का मानना है कि RBI द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का रुख अपनाने से इक्विटी बाज़ार के मूल्यांकन पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें फिक्स्ड इनकम निवेश को ज़्यादा आकर्षक बना देती हैं। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली भी बाज़ार पर हावी है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाज़ार से 6,121 करोड़ रुपए से ज़्यादा की निकासी की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग 4,596 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाज़ार को कुछ सहारा दिया।
आगे क्या हो सकता है?
बाज़ार जानकारों के अनुसार, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3% से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि बाज़ार अभी कंसोलिडेशन के दौर में प्रवेश कर सकता है। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,439 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है, जबकि लंबी अवधि में 23,100 का लक्ष्य अभी भी बरकरार है। वैश्विक स्तर पर भी ऊंचे बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा सतर्क बनी हुई है।
इनपुट: IANS



