गुरूवार, 30 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

भारत की ऊर्जा और ई-वाहन क्रांति: 2047 तक 10 गुना बढ़ सकती है अहम खनिजों की मांग

भारत जैसे-जैसे हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा है, देश में कुछ बेहद ज़रूरी खनिजों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक…

भारत की ऊर्जा और ई-वाहन क्रांति: 2047 तक 10 गुना बढ़ सकती है अहम खनिजों की मांग
(फोटो: IANS)

भारत जैसे-जैसे हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा है, देश में कुछ बेहद ज़रूरी खनिजों की मांग में भारी उछाल आने की संभावना है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2047 तक इन अहम खनिजों की ज़रूरत मौजूदा स्तर से 4 से 10 गुना तक बढ़ सकती है। ग्रांट थॉर्नटन भारत की यह रिपोर्ट बताती है कि इस मांग के पीछे सरकार के दो बड़े लक्ष्य हैं — 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना।

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रिपोर्ट का अनुमान है कि देश के बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम के कारण लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट, तांबा और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) जैसे खनिजों की मांग तेजी से बढ़ेगी। अकेले ईवी बैटरियों की मांग ही 2030 तक 110-130 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, भारत का 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य भी इन खनिजों की ज़रूरत को और बढ़ाएगा।

सिर्फ़ उपलब्धता नहीं, आत्मनिर्भरता पर ज़ोर

रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि भारत को केवल इन खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके बजाय, देश को खनन, रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और फंडिंग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना होगा। इसके लिए रिपोर्ट में 'विकसित भारत 2047' के विज़न के तहत एक तीन-चरणीय रोडमैप सुझाया गया है।

  • पहला चरण (2026-31): इस दौरान बुनियादी ढांचा तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी (EPR), सर्कुलर मिनरल प्रोसेसिंग ज़ोन और बैटरी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल हैं।
  • दूसरा चरण (2031-36): इस अवधि में रीसाइक्लिंग प्रणालियों का विस्तार करने, ग्रीन फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने और औद्योगिकीकरण को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
  • तीसरा चरण (2036-47): अंतिम चरण का लक्ष्य रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और देश में 10-15 अरब डॉलर की वार्षिक रीसाइक्लिंग अर्थव्यवस्था विकसित हो सके।

नीति और निवेश पर अहम सिफ़ारिशें

रिपोर्ट यह भी सिफारिश करती है कि इन खनिजों से जुड़ी नीतियों का मुख्य उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि देश की संसाधन सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए घरेलू स्तर पर वैल्यू एडिशन को अनिवार्य बनाने और खनिज-विशिष्ट रणनीतियां अपनाने का सुझाव दिया गया है।

चूंकि रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, इसलिए रिपोर्ट में एक बहु-स्तरीय वित्तपोषण व्यवस्था की सिफारिश की गई है। इसमें सरकारी सहायता, सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड, विदेशी निवेश (FDI) और अन्य वित्तीय साधनों का उपयोग शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के लिए 34,300 करोड़ रुपए का प्रावधान है, लेकिन मूल्य श्रृंखला के जोखिम भरे क्षेत्रों के लिए और अधिक लक्षित फंडिंग की ज़रूरत होगी।

इनपुट: IANS

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