गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

एक दशक में चार गुना बढ़ा कृषि कर्ज, ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

पिछले करीब एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज में जबरदस्त उछाल आया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ती मजबूती का संकेत है। सरकार द्वारा जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15

एक दशक में चार गुना बढ़ा कृषि कर्ज, ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती
(फोटो: IANS)

पिछले करीब एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज में जबरदस्त उछाल आया है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ती मजबूती का संकेत है। सरकार द्वारा जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में जो कृषि ऋण 8 लाख करोड़ रुपए था, वह वित्त वर्ष 2025-26 तक चार गुना से भी अधिक बढ़कर 32.50 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान ग्रामीण ऋण इकोसिस्टम में लगभग 13% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

विज्ञापन

ग्रामीण भारत में कर्ज की औपचारिक पहुंच बढ़ने से लोगों की खरीदने की क्षमता भी बढ़ी है। नाबार्ड (NABARD) के मई 2026 के ग्रामीण आर्थिक सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 77.2% ग्रामीण परिवारों ने अपने उपभोग स्तर में वृद्धि की जानकारी दी, जो लगातार बनी हुई मांग को दर्शाता है।

ग्रामीण बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार

इस वृद्धि के पीछे एक बड़ा कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार है। साल 2014 में जहां गांवों में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की 41,464 शाखाएं थीं, वहीं जुलाई 2025 तक यह संख्या 35% से अधिक बढ़कर 56,193 हो गई। इसके अलावा, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का भी 700 जिलों में 22,000 से अधिक शाखाओं का नेटवर्क है। सहकारी बैंकों और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों ने भी दूरदराज के इलाकों तक संस्थागत कर्ज पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। आरबीआई और नाबार्ड के अनुसार, सहकारी बैंकिंग नेटवर्क में 1,458 शहरी सहकारी बैंक, 34 राज्य सहकारी बैंक और 352 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल हैं।

स्वयं सहायता समूहों और योजनाओं की भूमिका

सरकार की गरीबी उन्मूलन योजनाओं ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित किया जाता है। 10 जुलाई 2026 तक देश में 19.83 लाख से ज्यादा ऐसे समूह सक्रिय थे, जिनके माध्यम से योजना की शुरुआत से अब तक 13.28 लाख करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है। इन समूहों को कर्ज दिलाने में 'बैंक सखी' मदद करती हैं। फरवरी 2026 तक 50,548 'बैंक सखी' तैनात की गई थीं, जिन्होंने 2013-14 से 12.18 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बैंक ऋण दिलाने में सहयोग किया।

जन धन योजना का प्रभाव

वित्तीय समावेशन में प्रधानमंत्री जन धन योजना भी एक अहम कड़ी साबित हुई है। 24 जून 2026 तक 58.63 करोड़ से ज्यादा जन धन खाते खोले गए, जिनमें 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा थी। इन खातों में से 55.7% (32.68 करोड़) महिलाओं के नाम पर हैं, जबकि 77.8% (45.62 करोड़) खाते ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →