गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण पर लगेगी लगाम? सरकार लाई नए ईंधन दक्षता नियमों का मसौदा
भारत में बिकने वाली कारों को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने वाहनों के लिए नए ईंधन दक्षता मानकों का मसौदा पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के
भारत में बिकने वाली कारों को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने वाहनों के लिए नए ईंधन दक्षता मानकों का मसौदा पेश किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, विद्युत मंत्रालय ने कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) के तीसरे चरण, यानी CAFE-III, के नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का लक्ष्य 2032 तक वाहनों से होने वाले औसत उत्सर्जन को काफी कम करना है।
यह मसौदा आम जनता और उद्योग जगत के सुझावों के लिए जारी किया गया है, जिस पर 6 अगस्त, 2026 तक प्रतिक्रिया दी जा सकती है। सुझाव विद्युत मंत्रालय के नई दिल्ली स्थित कार्यालय में या ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।
कौन से वाहन आएंगे दायरे में?
ये नए नियम M1 श्रेणी की यात्री गाड़ियों पर लागू होंगे। सरल शब्दों में, इसमें वे सभी कारें शामिल हैं जिनमें ड्राइवर समेत अधिकतम आठ लोगों के बैठने की जगह होती है। इसका मतलब है कि देश में बिकने वाली लगभग सभी निजी हैचबैक, सेडान और SUV कारें इसके दायरे में आएंगी, चाहे वे भारत में बनी हों या आयात की गई हों। हालांकि, कमर्शियल वाहन और बसें इस श्रेणी से बाहर हैं। साथ ही, सालाना 1,000 से कम गाड़ियां बेचने वाले निर्माताओं को इन नियमों से छूट दी गई है।
क्या है नया CAFE-III नियम?
मौजूदा CAFE-II नियम 31 मार्च, 2027 को समाप्त हो रहे हैं, जिसके बाद CAFE-III को लागू करने का प्रस्ताव है। इन नए नियमों को 2027-28 से 2031-32 के दौरान दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले तीन साल का एक चरण होगा और फिर अगले दो साल का दूसरा चरण। हर साल ईंधन दक्षता के लक्ष्य और कड़े होते जाएंगे, जिससे कंपनियों को लगातार अपनी तकनीक बेहतर करनी होगी।
विद्युत मंत्रालय के तहत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने इन मानकों को तैयार किया है। नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माने का भी प्रावधान है, हालांकि जुर्माने की राशि अभी स्पष्ट नहीं की गई है। इसके अलावा, मानकों से बेहतर प्रदर्शन करने पर मिलने वाले 'कंप्लायंस क्रेडिट' की कीमत 2,500 रुपये प्रति क्रेडिट तय की गई है, जो हर साल 500 रुपये बढ़ेगी।
उद्योग जगत की क्या है प्रतिक्रिया?
मसौदे के पिछले संस्करणों पर ऑटोमोबाइल उद्योग की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक ओर जहां सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने इस प्रस्ताव को संतुलित बताया है, वहीं कुछ कार निर्माताओं ने छोटी पेट्रोल कारों के लिए नियमों में कुछ राहत देने की मांग की है। इसके विपरीत, कुछ कंपनियों ने इस श्रेणी के लिए अलग नियम बनाने का विरोध भी किया है।
इनपुट: IANS



