बंगाल: सरकारी लाइब्रेरी में किताबों की खरीद पर उठे सवाल, तृणमूल काल की अनियमितताओं की जांच के आदेश
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान सरकारी और स्कूली पुस्तकालयों के लिए खरीदी गईं किताबों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय को मिली शिकायतों के ब
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन के दौरान सरकारी और स्कूली पुस्तकालयों के लिए खरीदी गईं किताबों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यालय को मिली शिकायतों के बाद अब जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग ने इस मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि साहित्यिक या विषय-वस्तु के लिहाज से कमजोर गुणवत्ता वाली किताबें बड़े पैमाने पर खरीदी गईं।
आरोप यह भी है कि खरीदी गई कई किताबें या तो तत्कालीन सत्ताधारी दल के नेताओं के रिश्तेदारों व करीबियों ने लिखी थीं, या फिर उन्हें ऐसे प्रकाशकों ने छापा था जिन्हें तृणमूल कांग्रेस का संरक्षण प्राप्त था। इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के मंत्री गौरी शंकर घोष को पूरी जांच कराने का निर्देश दिया है।
जांच का दायरा और संभावित न्यायिक आयोग
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह जांच सिर्फ कथित भ्रष्टाचार तक ही सीमित नहीं रहेगी। इस बात की भी पड़ताल की जाएगी कि क्या कुछ खास लेखकों की एक ही किताब को हर साल बड़ी संख्या में खरीदकर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किताबों के चयन के लिए कोई प्रभावी स्क्रीनिंग या गुणवत्ता मूल्यांकन प्रक्रिया नहीं थी, जिसकी वजह से यह तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं था कि कौन-सी किताबें खरीदी जानी चाहिए।
अधिकारी के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे कलकत्ता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग को भी सौंपा जा सकता है, ताकि गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
पिछली सरकार पर मुख्यमंत्री का निशाना
हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी की पिछली सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, "आज जब मैंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला है, तो जिस भी विभाग को देखता हूं, वहां पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से छोड़ी गई अव्यवस्था और भ्रष्टाचार दिखाई देता है।" उन्होंने यह भी कहा था कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शायद ही कोई विभाग भ्रष्टाचार से बचा हो।
इनपुट: IANS



