महाराष्ट्र में कट्टरपंथी विचारधारा पर बड़ा प्रहार, 114 प्रकाशनों पर सरकार ने लगाया प्रतिबंध
महाराष्ट्र में आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, गृह विभाग ने एक असाधारण राजपत्र…
महाराष्ट्र में आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, गृह विभाग ने एक असाधारण राजपत्र अधिसूचना जारी कर 114 प्रकाशनों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इन प्रकाशनों में पत्रिकाएं और अन्य साहित्य शामिल हैं, जिन पर चरमपंथी सोच को बढ़ावा देने का आरोप है।
सरकार ने इन सभी प्रतिबंधित प्रकाशनों की भौतिक (printed) और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने का भी आदेश दिया है। यह कार्रवाई एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस), खुफिया एजेंसियों और साइबर निगरानी से मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर की गई है। रिपोर्टों में पाया गया कि यह सामग्री लगातार प्रसारित की जा रही थी और इसका उद्देश्य युवाओं को गुमराह करना था।
क्यों और कैसे लिया गया यह फैसला?
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, यह प्रतिबंधित साहित्य हिंसक उग्रवाद और जिहाद का महिमामंडन करता है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सामग्री युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलती है, आतंकवादी संगठनों के लिए भर्ती में मदद करती है और देश की संप्रभुता, अखंडता व सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
मुंबई एटीएस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने 17 मार्च को एक पत्र के माध्यम से राज्य सरकार को इस खतरे से आगाह किया था। उन्होंने कुछ अखबारों, किताबों और अन्य दस्तावेजों को तत्काल जब्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी सिफारिश के आधार पर, राज्य सरकार ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 98(1) के तहत यह प्रतिबंध लागू किया है।
इनपुट: IANS



