ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री की ऊंची उड़ान: 2030 तक 10% सालाना ग्रोथ के साथ 124 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
भारत के ऑटो कंपोनेंट यानी वाहन कल-पुर्जा उद्योग में अगले कुछ वर्षों में ज़बरदस्त तेज़ी आने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2030 तक…
भारत के ऑटो कंपोनेंट यानी वाहन कल-पुर्जा उद्योग में अगले कुछ वर्षों में ज़बरदस्त तेज़ी आने का अनुमान है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह इंडस्ट्री वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 10 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ सकती है। इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण निर्माताओं का परंपरागत ऑटो पार्ट्स से आगे बढ़कर ज़्यादा मुनाफ़े वाले नए क्षेत्रों में कदम रखना है।
अमेरिकी इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैश की इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सेमीकंडक्टर उपकरण, रक्षा, एयरोस्पेस और डेटा-सेंटर पावर जेनरेशन जैसे क्षेत्रों में विस्तार से कंपनियों को बड़ा फ़ायदा मिलेगा। अनुमान है कि इस उद्योग की कुल आय वित्त वर्ष 2026 के 85.6 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक 124.4 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।
मुनाफ़े में और तेज़ बढ़ोतरी की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाँ आय 10% की दर से बढ़ेगी, वहीं कंपनियों का एबिटडा (ब्याज, टैक्स, और अन्य कटौतियों से पहले की कमाई) सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि कंपनियां ज़्यादा मार्जिन वाले精密 इंजीनियरिंग (Precision Engineering) के कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
गोल्डमैन सैश का मानना है कि भारत का ऑटो सेक्टर एक "बदलाव के दौर" से गुज़र रहा है। निर्माता कंपनियाँ मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए अपने उत्पादों की श्रृंखला बदल रही हैं और अपनी मौजूदा क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर रही हैं।
वैश्विक रुझान और नए अवसर
दुनियाभर की कंपनियाँ अपनी सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने के लिए चीन के अलावा दूसरे विकल्प तलाश रही हैं, जिसका सीधा लाभ भारत को मिल रहा है। इसके चलते सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव और औद्योगिक खरीदार भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपोनेंट्स, सेमीकंडक्टर वेफर-फैब्रिकेशन उपकरण, और रक्षा जैसे क्षेत्रों में नए दरवाज़े खुल रहे हैं।
ब्रोकरेज के अनुसार, इन कंपनियों को लेकर मौजूदा धारणा (कि ये कम प्राइसिंग पावर वाली और बार-बार पूंजीगत खर्च की ज़रूरत वाली कंपनियाँ हैं) उनके बढ़ते बाज़ार की पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वाहन बनाने वाली कंपनियों (OEMs) की तुलना में ऑटो कंपोनेंट कंपनियाँ अगले वेतन आयोग से प्रेरित डिमांड साइकिल के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि वे किसी एक मॉडल पर निर्भर न रहकर कई कंपनियों के लिए उत्पादन करती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस ग्रोथ को इलेक्ट्रिफिकेशन, आठवें वेतन आयोग, निर्यात, पुराने इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग का भारत में शिफ्ट होना और नए क्षेत्रों में विस्तार से बल मिलेगा।
इनपुट: IANS



