रेलवे का धुआंधार खर्च: चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में ही 39% बजट इस्तेमाल
भारतीय रेलवे ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित अपने विशाल पूंजीगत बजट का एक बड़ा हिस्सा शुरुआती चार महीनों में ही खर्च कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बुधवार…
भारतीय रेलवे ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आवंटित अपने विशाल पूंजीगत बजट का एक बड़ा हिस्सा शुरुआती चार महीनों में ही खर्च कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने बुधवार को संसद में जानकारी दी कि जुलाई तक रेलवे अपने कुल कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर चुका है। यह तेज खर्च रेलवे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा परियोजनाओं पर बढ़ते जोर को दिखाता है।
लोकसभा में एक लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के लिए रेलवे को कुल 2,93,030 करोड़ रुपए का बजटीय आवंटन मिला था। इसमें से 1,14,973 करोड़ रुपए जुलाई तक विभिन्न परियोजनाओं पर खर्च किए जा चुके हैं।
ट्रेनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
रेल मंत्री ने सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर बढ़ते खर्च का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2013-14 में जहां सुरक्षा मद पर 39,200 करोड़ रुपए खर्च होते थे, वहीं 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपए हो गई है। इसी दिशा में, स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली 'कवच' के विस्तार पर तेजी से काम हो रहा है। वैष्णव के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक 2,633 रूट किलोमीटर पर 'कवच 4.0' को चालू किया जा चुका है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त कॉरिडोर भी शामिल हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक 6,290 लोकोमोटिव (ट्रेन के इंजन) में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है और 7,190 अन्य लोकोमोटिव व 1,200 EMU/MEMU रेक में इसे लगाने का काम जारी है। जून 2026 तक इस परियोजना पर 3,875 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, और इस वित्त वर्ष के लिए 2,066 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान है।
बढ़ती रफ्तार, मजबूत होता नेटवर्क
रेलवे न केवल सुरक्षा बल्कि ट्रेनों की गति बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। वैष्णव ने बताया कि 2014 में सिर्फ 5,036 किलोमीटर रेल मार्ग 130 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे तेज गति के लिए उपयुक्त थे, जो 2026 में बढ़कर 24,173 किलोमीटर हो गए हैं। 'मिशन रफ्तार' के तहत, नई दिल्ली-मुंबई और नई दिल्ली-हावड़ा जैसे प्रमुख रूट को 160 किलोमीटर प्रति घंटा की गति के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे का तेज विकास
रेलवे के बुनियादी ढांचे में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। रेल मंत्री के अनुसार, 2014 से 2026 के बीच 36,429 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गईं, जो प्रतिदिन औसतन 8.32 किलोमीटर है। यह 2009-14 के 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन के औसत से लगभग दोगुना है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2026 तक, रेलवे की 514 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 8.31 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से 12,583 किलोमीटर का काम 3.05 लाख करोड़ रुपए की लागत से पूरा हो चुका है।
इनपुट: IANS



