सरकारी खजाना: पहली तिमाही में कमाई बढ़ी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में 23.7% का उछाल
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में केंद्र सरकार की आर्थिक सेहत मजबूत दिख रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सरकार की कुल प्राप्तियां पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले…
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में केंद्र सरकार की आर्थिक सेहत मजबूत दिख रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान सरकार की कुल प्राप्तियां पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 11.5% बढ़कर 10.49 लाख करोड़ रुपए हो गईं। यह पूरे साल के बजट अनुमान का 28.7% है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी के साथ-साथ सरकार ने राजकोषीय घाटे को भी नियंत्रण में रखा है।
जून 2026 तक की इस अवधि में सरकार का राजकोषीय घाटा करीब 3.1 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 18.2% है। बता दें कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटे को 4.4% पर रखने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया था और इस साल इसे जीडीपी के 4.3% तक लाने का लक्ष्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि घाटे में कमी से अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत होती है।
आय और व्यय का लेखा-जोखा
पहली तिमाही में सरकार की कुल कमाई (प्राप्तियां) 10,49,243 करोड़ रुपए रहीं। इसमें मुख्य रूप से 6,36,576 करोड़ रुपए शुद्ध कर राजस्व (Net Tax Revenue) से आए। इसके अलावा, 3,77,664 करोड़ रुपए गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) और 35,003 करोड़ रुपए गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों (Non-Debt Capital Receipts) से हासिल हुए।
वहीं, सरकार का कुल खर्च 13,57,076 करोड़ रुपए रहा, जो बजटीय अनुमान का 25.4% है। इस खर्च का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने पर गया, जिसकी राशि 3,46,414 करोड़ रुपए थी। इसके अलावा, उर्वरक और एलपीजी जैसी प्रमुख सब्सिडियों पर 1,14,812 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसी अवधि में केंद्र ने राज्यों को करों में उनके हिस्से के तौर पर 2,63,336 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर किए, हालांकि यह रकम पिछले साल की तुलना में 63,605 करोड़ रुपए कम है।
बुनियादी ढांचे पर बढ़ा निवेश
सरकार ने इस तिमाही में राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाह जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर अपना खर्च काफी बढ़ाया है। आंकड़ों के मुताबिक, पूंजीगत व्यय (Capex) 23.7% की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 3,40,258 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 2.75 लाख करोड़ रुपए था।
इनपुट: IANS



