गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कच्चे तेल में नरमी और मज़बूत खपत से शेयर बाज़ार को सहारा, साल के अंत तक 84,000 पर पहुँच सकता है सेंसेक्स

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय शेयर बाज़ार के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस अनुकूल स्थिति, मज़बूत घरेलू खपत और कंपनियों की आ

कच्चे तेल में नरमी और मज़बूत खपत से शेयर बाज़ार को सहारा, साल के अंत तक 84,000 पर पहुँच सकता है सेंसेक्स
(फोटो: IANS)

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारतीय शेयर बाज़ार के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस अनुकूल स्थिति, मज़बूत घरेलू खपत और कंपनियों की आय से जुड़े जोखिम में कमी के चलते सेंसेक्स इस साल के अंत तक 84,000 के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ़्तों में कच्चे तेल के दाम उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से युद्ध-पूर्व के स्तर पर लौट आए हैं, जिससे भारतीय इक्विटी बाज़ार का वृहद-आर्थिक (macroeconomic) परिदृश्य काफ़ी सुधरा है। यह जानकारी HSBC ब्रोकरेज की एक विस्तृत रिपोर्ट में सामने आई है।

आय और निवेश का बेहतर होता नज़रिया

रिपोर्ट में बताया गया है कि तेल की कीमतों में नरमी आने से कंपनियों के मार्जिन पर पड़ रहा दबाव कम हुआ है। इससे कंपनियों की आय के अनुमानों में किसी बड़ी कटौती की आशंका भी घट गई है। इसके अलावा, हाल के महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भी शुद्ध खरीदार बनकर उभरे हैं और सिर्फ़ जुलाई में ही अब तक लगभग 1.8 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बॉन्ड और बैंक डिपॉज़िट में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए हालिया कदमों से रुपये को स्थिरता मिली है और विदेशी निवेश की निकासी को रोकने में भी मदद मिली है।

कुछ जोखिम और चेतावनियाँ भी

इस सकारात्मक माहौल के बावजूद रिपोर्ट में कुछ संभावित जोखिमों का भी ज़िक्र है। यह चेतावनी दी गई है कि हालिया भारी खरीदारी के बाद आने वाले महीनों में खपत की रफ़्तार धीमी पड़ सकती है। साथ ही, अल नीनो का प्रभाव ग्रामीण माँग के लिए एक बड़ा ख़तरा बना हुआ है।

इसके अलावा, ब्रोकरेज ने भारतीय इक्विटी की रेटिंग को 'अंडरवेट' से सुधारकर 'न्यूट्रल' कर दिया है। हालाँकि, यह भी कहा गया है कि विदेशी निवेश शायद लंबे समय तक न टिके, क्योंकि वैश्विक निवेशक अपना ध्यान दोबारा अन्य बाज़ारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े अवसरों पर केंद्रित कर सकते हैं। इसी वजह से सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर को लेकर सतर्क रुख़ अपनाने की सलाह दी गई है, भले ही इस सेक्टर का वैल्यूएशन आकर्षक हो गया हो।

निवेशकों के लिए कहाँ हैं अवसर?

HSBC के एनालिस्ट को उम्मीद है कि विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी के लिए घरेलू निवेशकों की माँग मज़बूत बनी रहेगी। रिपोर्ट में निवेशकों के लिए भारत के प्राइवेट बैंकों, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, रियल एस्टेट, कमोडिटी और कुछ चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों को प्राथमिकता दी गई है।

इनपुट: IANS

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