केरल में कमजोर मानसून का असर: जलाशय सूखे, बिजली संकट गहराया, लोड शेडिंग शुरू
केरल में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते बिजली का संकट हाल के वर्षों में सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। राज्य के जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक ढंग से नीचे चला गया
केरल में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून के चलते बिजली का संकट हाल के वर्षों में सबसे गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। राज्य के जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक ढंग से नीचे चला गया है, जिसके कारण बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस स्थिति से निपटने के लिए पूरे राज्य में लोड शेडिंग यानी बिजली कटौती फिर से शुरू कर दी गई है।
राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता इस बात से बुरी तरह प्रभावित हुई है कि केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) के जलाशयों में कुल जल भंडारण घटकर केवल 29 प्रतिशत रह गया है। इसका सीधा असर घरेलू उत्पादन पर पड़ा है, जो 44.221 मिलियन यूनिट से गिरकर महज 16.608 मिलियन यूनिट रह गया है।
जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक
इडुक्की और सबरिगिरी जैसी प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के जलाशय अपनी कुल क्षमता के लगभग एक-तिहाई पर ही काम कर रहे हैं, जो पिछले साल की तुलना में काफी कम है। छोटे जलाशयों की स्थिति और भी खराब है। शोलायर, इडामलयार और कुंडाला में जलस्तर बहुत नीचे है, जबकि मट्टुपट्टी जलाशय में तो केवल 10 प्रतिशत पानी ही बचा है। सबरिगिरी प्रणाली पर निर्भर ककड़, अलुंकल और करिक्कायम जैसी कई परियोजनाओं में उत्पादन लगभग ठप हो गया है।
बढ़ती मांग और बाहरी निर्भरता
एक तरफ जहां उत्पादन घट रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। केरल की मौजूदा दैनिक खपत 88.64 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए 68.81 मिलियन यूनिट बिजली दूसरे राज्यों से महंगे दामों पर खरीदी जा रही है। अधिकारियों को चिंता है कि अगर बाहरी आपूर्ति में कोई रुकावट आती है तो राज्य में बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट हो सकता है।
सरकार और विपक्ष में राजनीतिक खींचतान
बिजली संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राज्य के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने गुरुवार को स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि यह कहना मुश्किल है कि कटौती कब तक चलेगी। उन्होंने संकट के लिए केंद्र से बिजली आवंटन में कमी और बिजली विनिमय व्यवस्था के तहत पुरानी बिजली लौटाने की बाध्यता को भी जिम्मेदार ठहराया।
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। माकपा नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सोशल मीडिया पर बिजली मंत्री पर तंज कसते हुए लिखा, "दिन में सूरज लोगों को ऊर्जा देता है, लेकिन रात में 'सनी' लोगों को परेशान कर रहे हैं।" इसके जवाब में सनी जोसेफ ने प्रशासनिक विफलता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पिछली LDF सरकार के समय में भी ऐसी पाबंदियां लगी थीं।
आम जनता लोड शेडिंग से परेशान है, जिसका असर शहरी जीवन से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक पर पड़ रहा है। यहां तक कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में भी बिजली गुल हो गई, जो संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
इनपुट: IANS



