ICICI लोम्बार्ड के शेयर में भारी गिरावट, कमजोर तिमाही नतीजों और बढ़े क्लेम ने बिगाड़ा खेल
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के निराशाजनक नतीजों के चलते बीमा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताब
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के निराशाजनक नतीजों के चलते बीमा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लगभग 15 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा।
अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 46 प्रतिशत घटकर 403.17 करोड़ रुपए रह गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 747.08 करोड़ रुपए था। इस तेज गिरावट के बाद गुरुवार सुबह के सत्र में शेयर 14.88% की कमजोरी के साथ 1,544 रुपए के स्तर तक फिसल गया था। हालांकि, बाद में थोड़ी रिकवरी हुई और दोपहर 12 बजे तक यह 11.39% की गिरावट के साथ 1,607 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था।
मुनाफे में गिरावट की क्या रही वजह?
आईसीआईसीआई लोम्बार्ड ने मुनाफे में कमी के लिए कई कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। कंपनी के अनुसार, बढ़े हुए क्लेम और मोटर थर्ड-पार्टी पोर्टफोलियो के लिए 165 करोड़ रुपए का रिजर्व प्रोविजन रखना इसकी मुख्य वजह रही। इसके अलावा, तिमाही के दौरान आग लगने की एक बड़ी घटना से 63 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जिसका सीधा असर कंपनी के कंबाइंड रेश्यो पर पड़ा।
कंपनी के अंडरराइटिंग मुनाफे का अहम पैमाना माना जाने वाला कंबाइंड रेश्यो जून तिमाही में बढ़कर 107.2 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 102.9 प्रतिशत था। कंपनी ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी कंबाइंड रेश्यो पर 2.8 प्रतिशत अंक का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
विश्लेषकों की राय और भविष्य का आउटलुक
कमजोर तिमाही प्रदर्शन को देखते हुए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के स्टॉक पर अपनी रेटिंग 'बाय' (खरीदने की सलाह) से घटाकर 'न्यूट्रल' कर दी है। पिछले एक साल में इस स्टॉक में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि बीते छह महीनों में यह 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरा है।
हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद कंपनी के मैनेजमेंट का मानना है कि आग से जुड़े पोर्टफोलियो में हुआ नुकसान आगे जारी रहने की उम्मीद नहीं है। प्रबंधन ने यह भी दोहराया कि हेल्थ इंश्योरेंस कारोबार, खासकर रिटेल हेल्थ सेगमेंट में लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।
इनपुट: IANS



