गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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E20 पेट्रोल से कार में खराबी: रायपुर उपभोक्ता कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कंपनी को गाड़ी बदलने का आदेश

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक उपभोक्ता अदालत ने E20 पेट्रोल से वाहन में खराबी के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसे इस तरह का देश का पहला निर्णय माना जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली

E20 पेट्रोल से कार में खराबी: रायपुर उपभोक्ता कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, कंपनी को गाड़ी बदलने का आदेश
(फोटो: IANS)

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की एक उपभोक्ता अदालत ने E20 पेट्रोल से वाहन में खराबी के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसे इस तरह का देश का पहला निर्णय माना जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने एक कार मालिक की शिकायत पर सुनवाई करते हुए कंपनी को वाहन बदलने या उसकी पूरी कीमत चुकाने का आदेश दिया है।

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शिकायतकर्ता प्रेमराज देवता ने अपनी मारुति ग्रैंड विटारा कार में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद लगातार आ रही समस्याओं को लेकर रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया था। उनकी शिकायत में इंजन की परेशानी, परफॉर्मेंस में गिरावट, मिसफायरिंग और माइलेज में लगातार कमी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। उनका कहना था कि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत के बावजूद ये दिक्कतें दूर नहीं हुईं।

कोर्ट का आदेश और मुआवजा

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत इस शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया। अपने फैसले में आयोग ने माना कि उपभोक्ता के पास E20 के अलावा कोई दूसरा ईंधन चुनने का व्यावहारिक विकल्प नहीं था, क्योंकि ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर यही उपलब्ध है।

14 जुलाई को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने संबंधित पक्षों को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई E20-संगत कार देने का निर्देश दिया है। यदि कंपनी ऐसा करने में विफल रहती है, तो उसे वाहन की कीमत और अन्य खर्चों के तौर पर कुल 20,50,494 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त, आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। तय समय में भुगतान न होने पर इस राशि पर 7% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मामले की टाइमलाइन

इस मामले में ऑनलाइन शिकायत 12 मार्च, 2025 को दर्ज की गई थी, जिसका पंजीयन 16 अप्रैल, 2025 को हुआ था। आयोग ने सुनवाई पूरी करने के बाद 14 जुलाई को अपना अंतिम आदेश जारी किया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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