विदेशी उड़ानें भरीं, घरेलू में थोड़ी नरमी: भारतीय एयरलाइन सेक्टर के लिए कैसा रहा जून का महीना?
भारतीय एयरलाइन कंपनियों के लिए यह जून का महीना मिला-जुला रहा। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ी, तो वहीं घरेलू ट्रैफिक में थोड़ी गिरावट देखी गई। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS की…
भारतीय एयरलाइन कंपनियों के लिए यह जून का महीना मिला-जुला रहा। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों की संख्या बढ़ी, तो वहीं घरेलू ट्रैफिक में थोड़ी गिरावट देखी गई। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान एयरलाइंस ने अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया, जिससे सेक्टर में मजबूत मांग के संकेत मिलते हैं।
फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म इक्विरस द्वारा सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जून में भारतीय एयरलाइंस से विदेश जाने वाले यात्रियों की संख्या लगभग 24 लाख रही। यह आंकड़ा मई के मुकाबले 4% ज़्यादा है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की रवानगी में भी महीने-दर-महीने 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले कुछ महीनों की रुकावटों के बाद उड़ानों के सामान्य होने का इशारा है।
घरेलू बाजार में मौसमी गिरावट
घरेलू विमानन क्षेत्र में गर्मियों की छुट्टियों का पीक सीजन खत्म होने के बाद एक स्वाभाविक नरमी आई। जून 2024 में घरेलू यात्रियों की संख्या करीब 1.35 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी महीने के मुकाबले 1% और मई 2024 की तुलना में 12% कम है। इसके बावजूद, यात्रियों की मांग को मजबूत माना जा रहा है।
यात्रियों की संख्या में कमी के बावजूद, पैसेंजर लोड फैक्टर (विमान में भरी हुई सीटों का औसत) 85.7% पर मजबूत बना रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 118 आधार अंकों का सुधार है, जो दिखाता है कि एयरलाइंस अपनी क्षमता का कुशलता से उपयोग कर रही हैं।
ईंधन और रुपये की दोहरी चुनौती
रिपोर्ट में एविएशन सेक्टर के सामने खड़ी दो बड़ी चुनौतियों का भी जिक्र है। एक तरफ एविएशन फ्यूल की ऊंची कीमतें और दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होकर लगभग 95.4 पर आना, एयरलाइंस के मुनाफे पर दबाव डाल रहा है। रुपये की कमजोरी से विमानों का किराया (लीजिंग), रखरखाव और अन्य डॉलर-आधारित परिचालन खर्च बढ़ जाते हैं। इन दोनों कारकों का असर निकट भविष्य में कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



