शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, तरजीही बाजार पहुंच पर बन रही है बात

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को इसकी जानकारी…

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, तरजीही बाजार पहुंच पर बन रही है बात
(फोटो: IANS)

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देश समझौते के अधिकांश हिस्सों पर सहमत हो गए हैं। फिलहाल, एक ऐसे ढांचे पर काम चल रहा है जिसके तहत दोनों पक्ष एक-दूसरे के बाजारों में तरजीही या विशेष पहुँच (Preferential Market Access) दे सकें।

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मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि कुछ मुद्दों पर अभी भी चर्चा जारी है, लेकिन बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा, "कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं, लेकिन समझौते पर उचित समय पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।"

बाजार पहुँच का ढाँचा सबसे अहम

वाणिज्य सचिव ने बताया कि समझौते में सबसे महत्वपूर्ण काम एक ऐसा तंत्र विकसित करना है जो भारतीय और अमेरिकी कारोबारियों को एक-दूसरे के देश में विशेष लाभ दे सके। उन्होंने समझाया कि भारत मुख्य रूप से 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) शुल्क व्यवस्था पर काम करता है, जबकि अमेरिका 'एक्जीक्यूटिव टैरिफ' प्रणाली का इस्तेमाल करता है। इसलिए, दोनों देशों के लिए एक साझा ढाँचा तैयार किया जा रहा है ताकि शुल्कों में अंतर पैदा करके व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके। अग्रवाल के मुताबिक, दोनों देशों के कारोबारी समुदाय इस प्रगति से संतुष्ट हैं।

अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते

राजेश अग्रवाल ने चिली और न्यूजीलैंड के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत-चिली मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भी अंतिम चरण में है और अगले दो-तीन महीनों में इसमें महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है। इसके अलावा, सरकार भारत-न्यूजीलैंड FTA को भी जल्द से जल्द लागू करने की कोशिश कर रही है, जिसमें अक्टूबर के आसपास अहम प्रगति देखने को मिल सकती है।

निर्यात पर माल ढुलाई लागत का असर

वैश्विक स्तर पर बढ़ती माल ढुलाई की लागत पर वाणिज्य सचिव ने कहा कि सरकार निर्यातकों के साथ मिलकर जहाजों और कंटेनरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने बताया कि बढ़ी लागत के बावजूद चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में भारत का निर्यात 15% से अधिक बढ़ा है। इससे यह संकेत मिलता है कि शिपिंग लागत का प्रभाव उतना गंभीर नहीं रहा जितनी आशंका थी।

सेवा निर्यात में विविधता की जरूरत

अग्रवाल ने भविष्य की रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि निर्यात में लंबी अवधि की वृद्धि के लिए भारत को अपने सेवा क्षेत्र के निर्यात में विविधता लानी होगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात लगभग 863 अरब डॉलर रहा, जिसमें 421 अरब डॉलर सेवा क्षेत्र से आया। लेकिन इसमें से लगभग आधा हिस्सा सिर्फ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और IT-सक्षम सेवाओं (ITES) का है। उन्होंने कहा, "फिलहाल हमारी सेवा निर्यात व्यवस्था मुख्य रूप से इन दो स्तंभों पर आधारित है, लेकिन यदि हमें दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि हासिल करनी है तो इसमें विविधता लानी होगी।"

इनपुट: IANS

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