भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता: नाबार्ड चेयरमैन ने बताया यह कैसे भारतीय उद्योगों की तस्वीर बदल सकता है
भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन व
भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी के अनुसार, यह ऐतिहासिक समझौता न सिर्फ दोनों लोकतांत्रिक देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करेगा, बल्कि भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ाएगा। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने इस समझौते के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. शाजी ने गुरुवार को कहा कि इस FTA के तहत कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क (जीरो-ड्यूटी) के प्रवेश मिलेगा, जबकि अन्य वस्तुओं पर भी टैरिफ कम किए जाएँगे। उन्होंने बताया, "आर्थिक दृष्टि से यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, क्योंकि कई उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी पहुंच मिलेगी और अन्य पर शुल्क कम होगा।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक समझौता है जिसमें निवेश, सेवाएँ और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।
समझौते का लाभ उठाने की तैयारी
नाबार्ड चेयरमैन का मानना है कि बाजार तक बेहतर पहुँच और आर्थिक उदारीकरण से भारतीय उद्योगों को विश्व स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने और कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलेगी। हालाँकि, उन्होंने आगाह किया कि इसका पूरा लाभ उठाने के लिए देश के भीतर एक सक्षम माहौल बनाना सबसे ज़रूरी काम होगा। उन्होंने कहा, "अब सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के भीतर ऐसा सक्षम माहौल तैयार किया जाए, जिससे भारत इस ऐतिहासिक समझौते का पूरा लाभ उठा सके।"
नाबार्ड की बदलती भूमिका
इस बातचीत में डॉ. शाजी ने नाबार्ड की बदलती भूमिका पर भी रोशनी डाली। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब नाबार्ड सिर्फ कर्ज देने वाली संस्था नहीं है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण और निवेश को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख संस्था के रूप में उभर रही है। उन्होंने IANS को बताया, "नाबार्ड खुद को ग्रामीण अवसंरचना के वित्तपोषक के रूप में स्थापित कर रहा है और साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में निवेश की कमियों की पहचान करने में भी मदद कर रहा है।"
इस दिशा में, नाबार्ड कृषि मूल्य श्रृंखलाओं (एग्रीकल्चर वैल्यू चेन) का मानचित्रण कर रहा है ताकि उत्पादन से लेकर वितरण तक निवेश के अवसर पैदा हों और स्थायी आजीविका सुनिश्चित हो सके। संस्था किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और सहकारी समितियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। इसी प्रयास के तहत अब तक लगभग 70,000 प्राथमिक सहकारी समितियों का कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता और कामकाज में दक्षता आएगी।
इनपुट: IANS



