परिसीमन विधेयक पर आम सहमति बनाने की मांग, खड़गे ने मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि परिसीमन से जुड़े संशोधित विधेयकों को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश करने से पहले, उन पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि परिसीमन से जुड़े संशोधित विधेयकों को संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश करने से पहले, उन पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, खड़गे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर यह मांग की है।
अपने पत्र में खड़गे ने इस बात पर जोर दिया है कि उन्होंने इस साल की शुरुआत में भी इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत बताई थी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे मार्च और अप्रैल 2026 में संसदीय कार्य मंत्री को पत्र लिखकर उन्होंने सरकार के परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक का अनुरोध किया था, लेकिन उन अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया।
विफल हो चुका है पिछला विधेयक
खड़गे ने इस बात का भी उल्लेख किया कि आम सहमति न बन पाने का नतीजा पहले भी देखने को मिल चुका है। उन्होंने लिखा, “दुर्भाग्यवश, मेरे अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया। इसके परिणामस्वरूप, लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 स्पष्ट अंतर से आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने में विफल रहा।” यह विधेयक 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में पारित नहीं हो सका था।
सरकार की नई तैयारी और कांग्रेस की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें हैं कि केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का एक संशोधित संस्करण फिर से पेश करने की योजना बना रही है। उन्होंने लिखा, “इन रिपोर्टों के आलोक में, मैं आपसे एक बार फिर परिसीमन और संबंधित मुद्दों पर सरकार के संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध करता हूं।” उन्होंने यह भी आग्रह किया कि इन विधेयकों को संसद में पेश करने से पहले राजनीतिक दलों को इनका विस्तार से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
खड़गे के इस पत्र को कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने साझा किया और इसे कांग्रेस पार्टी तथा स्वयं खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी पोस्ट किया है। बता दें कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करना है। साथ ही, यह लोकसभा की सीटों में वृद्धि और 1976 के बाद पहली बार राज्यों के बीच संसदीय सीटों के पुनर्वितरण के लिए परिसीमन का आधार भी तैयार करता है।
इनपुट: IANS



