गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु बिस्वास पर ED का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूरक शिकायत दर्ज

कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शिकंजा कस दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ED के कोलकाता

कोलकाता पुलिस के पूर्व डीसीपी शांतनु बिस्वास पर ED का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूरक शिकायत दर्ज
(फोटो: IANS)

कोलकाता पुलिस के पूर्व उपायुक्त (DCP) शांतनु सिन्हा बिस्वास के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में शिकंजा कस दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ED के कोलकाता कार्यालय ने बिस्वास के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत पहली पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की है।

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यह शिकायत 10 जुलाई 2026 को कोलकाता नगर सत्र न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष दायर की गई। यह कार्रवाई बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और अन्य से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। इसी सिलसिले में शांतनु सिन्हा बिस्वास को 14 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और वे 14 दिनों तक ED की हिरासत में रहे। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

ED ने अपनी जांच में पाया कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने पुलिस विभाग में अपने पद का दुरुपयोग कर और आपराधिक गतिविधियों में शामिल होकर कम से कम 2.89 करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ कमाया। जांच से पता चला कि बिस्वास ने जय एस. कामदार नामक एक प्रभावशाली बिचौलिए का इस्तेमाल तबादलों और नियुक्तियों के लिए किया।

एजेंसी के मुताबिक, बिस्वास पुलिस जांचों में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते थे। आरोप है कि वह FIR दर्ज कराने जैसे पुलिस मामलों में अवैध मदद के बदले जय कामदार और उसके परिवार से महंगे उपहार लिया करते थे, जिससे उन्होंने खुद को और अपने परिवार को आर्थिक रूप से समृद्ध किया।

अपराध की कमाई से बनाई संपत्ति

ED की जांच में यह भी सामने आया है कि शांतनु सिन्हा बिस्वास ने मुर्शिदाबाद के कंडी में एक संपत्ति का महंगा निर्माण और नवीनीकरण करवाया, जिसके लिए अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, कोलकाता और आसपास की कुछ आवासीय संपत्तियों का भी पता चला है, जो दूसरों के नाम पर खरीदी गई थीं लेकिन उनका वास्तविक स्वामित्व बिस्वास और उनके परिवार के पास है।

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR से शुरू हुआ था। बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और अन्य पर दंगा, हत्या का प्रयास, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप थे। इन आरोपियों पर पश्चिम बंगाल में संगठित आपराधिक गिरोह चलाने और अवैध रूप से बड़ी मात्रा में धन इकट्ठा करने का आरोप है।

इनपुट: IANS

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