गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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खनिज नीलामी में झारखंड पिछड़ा: बाबूलाल मरांडी ने सरकारी नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल

झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर खनिज प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के

खनिज नीलामी में झारखंड पिछड़ा: बाबूलाल मरांडी ने सरकारी नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

झारखंड में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर खनिज प्रबंधन में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज संसाधन होने के बावजूद, झारखंड खनन उत्पादन, राजस्व और रोजगार के मामले में अपनी क्षमता से बहुत पीछे है।

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रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मरांडी ने दावा किया कि वर्ष 2019-20 से अब तक पूरे देश में जहां 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई, वहीं झारखंड में यह संख्या मात्र तीन रही।

उत्पादन और राजस्व में ओडिशा से तुलना

मरांडी ने झारखंड की तुलना पड़ोसी राज्य ओडिशा से करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों में अंतर संसाधनों का नहीं, बल्कि नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच ओडिशा का लौह अयस्क उत्पादन 120 मिलियन टन से बढ़कर 180 मिलियन टन हो गया, जबकि झारखंड का उत्पादन लगभग 23 मिलियन टन पर ही स्थिर बना रहा।

राजस्व के मोर्चे पर भी उन्होंने बड़े अंतर की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनन से करीब 22 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जबकि ओडिशा ने कम खनिज संसाधन होते हुए भी लगभग 46 हजार करोड़ रुपये अर्जित किए।

स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

नेता प्रतिपक्ष ने पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा क्षेत्र के अपने हालिया दौरे का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई लौह अयस्क खदानों की लीज खत्म होने के बाद न तो उनका नवीनीकरण हुआ और न ही उनकी फिर से नीलामी की गई। इस वजह से कई खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर घटे हैं।

मरांडी के अनुसार, इसका असर सिर्फ खदान मजदूरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन, होटल और छोटे कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने जामदा बाजार का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह इलाका आज मंदी की चपेट में है, जबकि महज 20 किलोमीटर दूर ओडिशा का बड़बिल क्षेत्र समय पर खदानों की नीलामी के कारण तेजी से विकसित हुआ है।

DMFT फंड और पारदर्शिता पर सवाल

बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2016 से 2026 के बीच जिले में इस मद में करीब 3,700 करोड़ रुपये जमा हुए, लेकिन इसकी वार्षिक रिपोर्ट, बजट और परियोजनाओं का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर आखिरी अपडेट 2018 का है, जो पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने बंद खदानों की शीघ्र नीलामी करने, खनन गतिविधियां दोबारा शुरू करने और DMFT फंड के उपयोग का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की। मरांडी ने कहा, "खनिज संपदा पर पहला अधिकार राज्य की जनता का है और सरकार को यह बताना चाहिए कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों के लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित क्यों हैं।"

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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