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उड़ान योजना 2.0: सरकार ₹28,840 करोड़ से बदलेगी देश की हवाई तस्वीर, बनेंगे 100 नए एयरपोर्ट

देश के छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों को हवाई मार्ग से जोड़ने की महत्वाकांक्षी 'उड़ान' योजना अब एक नए और बड़े स्वरूप में सामने आई है। सरकार ने इस योजना के संशोधित चरण के लिए 28,840 करोड़ रुपए के…

उड़ान योजना 2.0: सरकार ₹28,840 करोड़ से बदलेगी देश की हवाई तस्वीर, बनेंगे 100 नए एयरपोर्ट
(फोटो: IANS)

देश के छोटे शहरों और दूर-दराज के इलाकों को हवाई मार्ग से जोड़ने की महत्वाकांक्षी 'उड़ान' योजना अब एक नए और बड़े स्वरूप में सामने आई है। सरकार ने इस योजना के संशोधित चरण के लिए 28,840 करोड़ रुपए के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में देश के विमानन ढांचे में बड़ा बदलाव लाना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल के केंद्र में 100 नए हवाई अड्डों का विकास और 200 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण शामिल है।

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यह योजना अक्टूबर 2016 में शुरू की गई क्षेत्रीय संपर्क योजना (आरसीएस)-उड़ान की सफलताओं पर आधारित है, जिसने आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को सुलभ बनाने और कम सेवा वाले क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उसी का परिणाम है कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है और देश में हवाई अड्डों की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 15 जुलाई तक 165 हो गई है।

बुनियादी ढांचे पर सबसे ज़्यादा ज़ोर

संशोधित उड़ान योजना का एक मुख्य हिस्सा एयरोड्रम का विकास है। इसके लिए अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया है। इस राशि का उपयोग देश भर में मौजूदा हवाई पट्टियों को विकसित कर 100 हवाई अड्डों में बदलने के लिए किया जाएगा। साथ ही, इन छोटे हवाई अड्डों के संचालन को टिकाऊ बनाने के लिए तीन साल तक वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 2,577 करोड़ रुपए है और इससे लगभग 441 हवाई अड्डों को मदद मिलने की उम्मीद है।

दुर्गम क्षेत्रों के लिए हेलीपैड और हेलीकॉप्टर

पहाड़ी और दुर्गम इलाकों की चुनौतियों को देखते हुए, जहां पारंपरिक हवाई अड्डे बनाना मुश्किल है, यह योजना एक विशेष समाधान लेकर आई है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, ऐसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड बनाए जाएंगे। प्रति हेलीपैड 15 करोड़ रुपए की लागत से, इस पर कुल 3,661 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इन हेलीपैड से स्वास्थ्य सेवा, आपातकालीन राहत और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

एयरलाइंस को भी मिलेगी वित्तीय मदद

छोटे बाजारों में उड़ानें संचालित करने वाली एयरलाइन कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (वीजीएफ) का प्रावधान जारी रहेगा। यह एक तरह की सब्सिडी है जो घाटे वाले रूट पर संचालन के नुकसान की भरपाई में मदद करती है। मॉडिफाइड फ्रेमवर्क के तहत, दस साल की अवधि के लिए वीजीएफ के लिए कुल 10,043 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। एयरलाइंस को यह मदद पांच साल तक मिलेगी, लेकिन तीसरे साल से इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा ताकि वे व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

इसके अलावा, 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को बढ़ावा देते हुए योजना में घरेलू विमानन क्षमता को मजबूत करने पर भी ज़ोर दिया गया है। इसके तहत पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए दो एचएएल डॉर्नियर विमानों का प्रस्ताव है, जो मुश्किल हालात में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए जाने जाते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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