भारत में विदेशी निवेश की बहार: एक साल में आया रिकॉर्ड 95 अरब डॉलर का FDI, वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार
भारत के लिए विदेशी निवेश के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने अब तक का सबसे ज़्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल किया है। इस एक साल की अवधि में भारत में कुल 94.84 अरब…
भारत के लिए विदेशी निवेश के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने अब तक का सबसे ज़्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल किया है। इस एक साल की अवधि में भारत में कुल 94.84 अरब डॉलर का सकल विदेशी निवेश आया, जो एक नया रिकॉर्ड है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, सरकार ने मंगलवार को संसद में यह जानकारी दी। यह आँकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 80.61 अरब डॉलर के मुकाबले एक महत्वपूर्ण उछाल दर्शाता है।
यह बढ़ोतरी सिर्फ़ सकल निवेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शुद्ध एफडीआई में भी एक मज़बूत सुधार देखने को मिला है। हाल के वर्षों में गिरावट के बाद, वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध एफडीआई बढ़कर 6.95 अरब डॉलर पर पहुँच गया, जबकि इससे ठीक एक साल पहले यह महज़ 0.96 अरब डॉलर था।
निवेश घटने-बढ़ने के पीछे की वजह
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि हाल के वर्षों में शुद्ध एफडीआई में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश की वापसी (रिपैट्रिएशन) और भारत से बाहर होने वाले निवेश (ओडीआई) में बढ़ोतरी रही है। उन्होंने कहा कि 2022 में लागू किए गए उदार नियमों के कारण भारतीय कंपनियाँ विदेशों में अपना विस्तार कर रही हैं, जिससे वे वैश्विक स्तर पर ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बन रही हैं और अंततः भारतीय अर्थव्यवस्था को ही मज़बूती मिल रही है।
चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी निवेशकों द्वारा अपने निवेश को वापस निकालना इस बात का संकेत है कि भारत उन्हें अच्छा रिटर्न दे रहा है। उनके मुताबिक, इससे दुनिया भर में भारत की छवि एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में और भी मज़बूत हुई है।
वैश्विक मंच पर भारत की बेहतर स्थिति
भारत की यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भी पहचानी गई है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताज़ा वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के अनुसार, एफडीआई आकर्षित करने वाले देशों की वैश्विक रैंकिंग में भारत दो पायदान ऊपर चढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में भारत 38.89 अरब डॉलर के एफडीआई प्रवाह के साथ दुनिया का 11वां सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता देश बन गया, जबकि 2024 में 27.09 अरब डॉलर के साथ यह 13वें स्थान पर था।
यूएनसीटीएडी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत ने सेवा क्षेत्र के अलावा विनिर्माण और उन्नत उद्योगों में निवेश बढ़ाने के लिए सक्रिय नीतियाँ अपनाई हैं, जिससे यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रदर्शन विकासशील देशों के औसत 2% और एशियाई विकासशील देशों के 3% की वृद्धि दर से कहीं बेहतर रहा है।
ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में भी भारत आगे
सरकार ने बताया कि 2025 में दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड निवेश परियोजनाएँ भी भारत के हिस्से में आईं। इनमें अमेरिका की अल्फाबेट इंक द्वारा भारत में 14.5 अरब डॉलर का डेटा सेंटर निवेश शामिल है, जो दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड परियोजना है। इसके अलावा, पोलैंड की हाइनफ्रा ने भी आंध्र प्रदेश में 4 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
इनपुट: IANS



