भारत का स्मार्टफोन निर्यात नई ऊंचाई पर, पहली तिमाही में आंकड़ा 10 अरब डॉलर के करीब
भारत के स्मार्टफोन निर्यात ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अप्रैल से जून 2024 के बीच देश से लगभग 10 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन विदेश भेजे गए। समाचार एजेंसी…
भारत के स्मार्टफोन निर्यात ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अप्रैल से जून 2024 के बीच देश से लगभग 10 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन विदेश भेजे गए। समाचार एजेंसी IANS से मिले आंकड़ों के अनुसार, इस शानदार प्रदर्शन में सबसे बड़ी भूमिका एप्पल आईफोन के शिपमेंट की रही है।
पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि (अप्रैल-जून 2023) में यह आंकड़ा 7.97 अरब डॉलर था, जो इस साल 23.4 प्रतिशत बढ़कर 9.84 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। 'मेड इन इंडिया' स्मार्टफोन्स के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाज़ार बना हुआ है, जहाँ भारतीय निर्मित डिवाइसों की मांग लगातार बढ़ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में स्मार्टफोन की बड़ी हिस्सेदारी
स्मार्टफोन का यह बढ़ता निर्यात देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को भी मजबूती दे रहा है। अप्रैल-जून तिमाही में भारत ने कुल 15.2 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का निर्यात किया, जिसमें अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 64.8 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि कैसे स्मार्टफोन भारत की निर्यात सूची में एक प्रमुख उत्पाद बनकर उभरा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में 'मेड इन इंडिया' स्मार्टफोन के कुल शिपमेंट में 8% की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात में 28% का उछाल देखा गया। इसका मतलब है कि देश में बने कुल स्मार्टफोन्स में से लगभग एक-तिहाई विदेश भेजे गए।
एप्पल और सैमसंग का दबदबा
इस वृद्धि को गति देने में एप्पल के मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर सबसे आगे हैं। फॉक्सकॉन होन हाई का निर्यात, आईफोन की मजबूत मांग के चलते, साल-दर-साल 48% बढ़ा। वहीं, सैमसंग ने भी अपने निर्यात में 4% की वृद्धि दर्ज की है।
आंकड़े बताते हैं कि पूरे वित्त वर्ष 2023-24 में भारत से करीब 2.6 लाख करोड़ रुपए के स्मार्टफोन निर्यात हुए, जिसमें अकेले आईफोन की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक (लगभग 22 अरब डॉलर) थी। इस प्रदर्शन के साथ एप्पल देश का सबसे बड़ा सिंगल-ब्रांडेड निर्यातक बन गया है।
सरकारी नीतियों से मिली मदद
स्मार्टफोन निर्माण और निर्यात में इस तेज उछाल के पीछे सरकार की कई नीतियों का भी योगदान है। इनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में सुधार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए बढ़ा हुआ बजटीय समर्थन और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में ढील जैसे कदम शामिल हैं। इन सभी का लक्ष्य भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
इनपुट: IANS



