ब्रिक्स की कमान 2026 में भारत के पास: वैश्विक व्यवस्था में बढ़ती भूमिका और नई दिल्ली का विज़न
कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक आर्थिक समूह के रूप में शुरू हुआ ब्रिक्स आज एक प्रभावशाली भू-राजनीतिक संगठन बन चुका है, जिसका प्रभाव चार महाद्वीपों में फैला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक आर्थिक समूह के रूप में शुरू हुआ ब्रिक्स आज एक प्रभावशाली भू-राजनीतिक संगठन बन चुका है, जिसका प्रभाव चार महाद्वीपों में फैला है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत इस विस्तारित समूह की अध्यक्षता संभालेगा। यह चौथी बार होगा जब भारत ब्रिक्स की कमान अपने हाथों में लेगा और इस दौरान उसका लक्ष्य संगठन को और अधिक समावेशी व प्रभावी बनाना है।
ब्रिक्स अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इंडोनेशिया समेत 11 सदस्य देशों का एक शक्तिशाली मंच है। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग 49.5% आबादी, 40% वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इसकी बढ़ती आर्थिक और जनसांख्यिकीय शक्ति को दर्शाता है।
भारत की अध्यक्षता और लक्ष्य
भारत की 2026 की अध्यक्षता का विषय "बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी" रखा गया है। इसी थीम के तहत नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। भारत का मुख्य उद्देश्य संगठन की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, विकास और नवाचार को प्राथमिकता देना, और 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच के केंद्र में लाना है।
समूह का विस्तार और प्रभाव
ब्रिक्स के विस्तार की प्रक्रिया जनवरी 2024 में शुरू हुई, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ। इसके अलावा, 2025 में 'पार्टनर कंट्री' श्रेणी के तहत बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम भी इस ढांचे से जुड़े, जिससे समूह का वैश्विक प्रभाव और भी बढ़ गया है।
बहुआयामी एजेंडा
समय के साथ ब्रिक्स का एजेंडा सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा है। अब यह आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी काम करता है। यह समूह विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक संतुलित प्रतिनिधित्व की भी वकालत करता है, ताकि वैश्विक शासन को आज की चुनौतियों के अनुसार अधिक समावेशी और प्रभावी बनाया जा सके।
इनपुट: IANS



