विदेशी पूंजी की बहार: वित्त वर्ष 2027 में भारत को मिल सकता है $95 अरब का निवेश, भुगतान संतुलन होगा मज़बूत
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों और मज़बूत विदेशी मुद्रा जमा (FCNR-B) के चलते भारत में वित्…
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों और मज़बूत विदेशी मुद्रा जमा (FCNR-B) के चलते भारत में वित्त वर्ष 2026-27 तक 90 से 95 अरब डॉलर का कुल पूंजी प्रवाह आने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे देश का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) 64 अरब डॉलर के बड़े सरप्लस में पहुँच सकता है।
केयरएज रेटिंग्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह मज़बूत विदेशी निवेश भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को काफ़ी ताक़त देगा और वैश्विक बाज़ारों में किसी भी तरह की अस्थिरता के सामने एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। यह अनुमान वित्त वर्ष 2026 के 23.6 अरब डॉलर के घाटे और वित्त वर्ष 2025 के 5 अरब डॉलर के घाटे के मुकाबले एक बड़े बदलाव का संकेत है।
RBI के उपायों का असर
रिपोर्ट में इस सकारात्मक बदलाव का श्रेय RBI की उन नीतियों को दिया गया है, जिन्हें 5 जून, 2026 को घोषित किया गया था। इनमें विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा, बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) और विदेशी मुद्रा में अन्य स्रोतों से उधार (OFCB) के लिए रियायती स्वैप विंडो जैसे उपाय शामिल हैं। इन घोषणाओं को निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है।
आंकड़ों के अनुसार, 5 जून से 31 जुलाई 2026 के बीच ही इन उपायों के ज़रिए कुल 40.8 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आई। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा FCNR(B) जमा का रहा, जिससे 36.7 अरब डॉलर आए, जबकि ECB और OFCB से संयुक्त रूप से 4.1 अरब डॉलर का योगदान मिला।
पूंजी खाते और बैंकिंग सिस्टम पर प्रभाव
इस बड़े पूंजी प्रवाह के कारण भारत के पूंजी खाते का सरप्लस भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, यह सरप्लस अब लगभग 108 अरब डॉलर हो सकता है, जबकि पिछले साल यह महज़ 2 अरब डॉलर था। केयरएज ने अकेले FCNR(B) से आने वाले प्रवाह का अनुमान बढ़ाकर करीब 80 अरब डॉलर कर दिया है।
फिलहाल बड़े बैंक FCNR जमा पर 6.0% से 6.5% तक की ब्याज दर दे रहे हैं, जबकि कुछ छोटे और नए बैंक लगभग 7% तक की पेशकश कर रहे हैं। इस बढ़ते निवेश का सीधा असर देश की बैंकिंग प्रणाली में नकदी (तरलता) की स्थिति पर भी पड़ रहा है। जुलाई में बैंकिंग सिस्टम में औसत तरलता करीब 1.1 लाख करोड़ रुपए थी, जो अगस्त में अब तक बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपए हो गई है।
इनपुट: IANS



