यूरोप की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी कर रहा भारत, बना डीज़ल का अहम सप्लायर
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारत की स्थिति एक बड़े उपभोक्ता से आगे बढ़कर एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में मज़बूत हो रही है। ख़ासतौर पर यूरोप के डीज़ल बाज़ार में भारत एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है। समाचार…
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारत की स्थिति एक बड़े उपभोक्ता से आगे बढ़कर एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में मज़बूत हो रही है। ख़ासतौर पर यूरोप के डीज़ल बाज़ार में भारत एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह रूस से आपूर्ति में भारी गिरावट और अमेरिका से निर्यात में आई कमी है, जिससे पैदा हुए खालीपन को भारतीय रिफाइनरियों ने भरा है।
ऊर्जा ख़ुफ़िया फ़र्म वोर्टेक्सा की रिपोर्ट बताती है कि अगस्त 2026 में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर यूरोप पहुँचे कुल डीज़ल कार्गो का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भारत से गया था। यह आँकड़ा भारत की बढ़ती भूमिका को साफ़ दिखाता है। इस महीने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से हर दिन लगभग 2 लाख बैरल डीज़ल और गैसऑयल यूरोप भेजा गया, जो पिछले साल के स्तर के बराबर ही था।
रूस की आपूर्ति में रिकॉर्ड गिरावट
यूरोप में डीज़ल सप्लाई का संकट मुख्य रूप से रूस से निर्यात में आई भारी कमी के कारण गहराया है। कभी यूरोप का मुख्य सप्लायर रहा रूस, अगस्त 2026 के पहले 25 दिनों में समुद्री रास्ते से औसतन केवल 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन डीज़ल और गैसऑयल का निर्यात कर सका। यह पिछले साल की तुलना में 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम और पाँच साल के मौसमी औसत से क़रीब 81 प्रतिशत नीचे है।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने 1 सितंबर से निर्यात प्रतिबंधों में कुछ ढील ज़रूर दी है, लेकिन यूक्रेन द्वारा रूसी ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के कारण आपूर्ति में तत्काल सुधार की उम्मीद कम है। अकेले जुलाई और अगस्त में ही रूसी रिफाइनरियों पर 32 ड्रोन हमले दर्ज किए गए, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता और चुनौतियाँ
भारत की इस सफलता के पीछे उसकी विशाल रिफाइनिंग क्षमता है। 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष की स्थापित क्षमता के साथ भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र है। यह क्षमता देश की घरेलू ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है, जिससे भारतीय कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्यात का मौक़ा मिलता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था।
हालाँकि, रिपोर्ट इस बात को लेकर भी आगाह करती है कि यूरोप के बाज़ार में भारत की इस भूमिका की स्थिरता पर सवालिया निशान हैं। इसकी बड़ी वजह भारत को मिलने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में आई कमी है। अगस्त में भारत की कच्चे तेल और कंडेनसेट की आपूर्ति लगातार दूसरे महीने घटकर लगभग 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि एक साल पहले यह 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। अगर रूस से आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है और यूरोप में माँग मज़बूत बनी रहती है, तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए निर्यात के अवसर और बढ़ सकते हैं, बशर्ते वे कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर पाएँ।
इनपुट: IANS



