गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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UPI और डिजिटल इंफ्रा से भारत का फिनटेक निर्यात 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है: वाणिज्य सचिव

भारत अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे सफल मॉडलों को दुनिया के दूसरे देशों, खास तौर पर 'ग्लोबल साउथ' तक पहुंचाने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि…

UPI और डिजिटल इंफ्रा से भारत का फिनटेक निर्यात 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है: वाणिज्य सचिव
(फोटो: IANS)

भारत अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे सफल मॉडलों को दुनिया के दूसरे देशों, खास तौर पर 'ग्लोबल साउथ' तक पहुंचाने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि इस कदम से देश का फिनटेक सेवा निर्यात मौजूदा 8 अरब डॉलर से बढ़कर 60 से 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बात वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में कही।

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अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी फिनटेक क्षमताओं का इस्तेमाल वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर फिनटेक सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और अगर भारत इसमें केवल 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी भी हासिल कर लेता है, तो यह निर्यात में एक बड़ी छलांग होगी।

समझौतों और सहयोग पर जोर

भारत इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है। राजेश अग्रवाल ने बताया कि देश ने अब तक लगभग 23 देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, सरकार कई देशों के साथ भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने पर भी काम कर रही है। इसमें उन देशों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं।

उन्होंने कहा, "हम जिन भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत करते हैं, उनमें भुगतान प्रणालियों के समन्वय पर भी चर्चा करते हैं, खासकर उन देशों के साथ जहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है।"

व्यापार समझौतों की भूमिका

वाणिज्य सचिव ने फिनटेक क्षेत्र के विकास में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन समझौतों की बातचीत के दौरान सरकार वित्तीय नियमन, दूरसंचार, सीमा-पार डेटा प्रवाह, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), निवेश और पेशेवरों की आवाजाही से जुड़ी बाधाओं को दूर करने का प्रयास करती है। इसका उद्देश्य फिनटेक अर्थव्यवस्था के लिए एक अनुकूल माहौल बनाना है। अग्रवाल ने बताया कि पिछले चार से पांच वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनके दायरे में आने वाले देशों की कुल अर्थव्यवस्था करीब 60 ट्रिलियन डॉलर है।

राजेश अग्रवाल के मुताबिक, प्रौद्योगिकी की मदद से वित्तीय सेवाओं की लागत को काफी कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों और फिनटेक क्षमताओं का वैश्विक विस्तार करके विशेष रूप से रेमिटेंस (विदेश से पैसा भेजने), कर्ज वितरण और भुगतान सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाया जा सकता है।

इनपुट: IANS

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