पश्चिम एशिया में तनाव: होर्मुज और लाल सागर के रास्ते बंद हुए तो भारत के व्यापार पर क्या होगा असर?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत के समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है, जिससे आयात और निर्यात करने वाली कंपनियों, खासकर छोटे और मझोले कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केयरएज रेटिंग्स की…
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत के समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है, जिससे आयात और निर्यात करने वाली कंपनियों, खासकर छोटे और मझोले कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। केयरएज रेटिंग्स की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अहम समुद्री रास्ते बाधित होते हैं, तो न सिर्फ माल ढुलाई का खर्च और समय बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इन दो प्रमुख मार्गों पर लंबे समय तक चलने वाली कोई भी रुकावट भारतीय कारोबारियों के मुनाफे को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी। इससे समुद्री बीमा का प्रीमियम और मालभाड़ा (फ्रेट) बढ़ना तय है। बड़ी कंपनियां तो शायद इस झटके को सह लें, लेकिन छोटे उद्यमियों के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल होगा, जिससे उन्हें नकदी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
कच्चे तेल पर निर्भरता और कीमतों का गणित
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। देश का लगभग 40% कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आयात और एलएनजी-एलपीजी की बड़ी खेप इसी रास्ते से आती है। रिपोर्ट याद दिलाती है कि मई 2026 में सिर्फ होर्मुज में व्यवधान के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर होर्मुज और लाल सागर, दोनों रास्ते एक साथ प्रभावित होते हैं, तो ब्रेंट क्रूड 130-135 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर बाधा आने का खतरा पैदा हो जाएगा।
वैश्विक सप्लाई चेन पर दोहरा संकट
यह संकट सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। यमन के हूती आंदोलन ने लाल सागर में समुद्री यातायात को बाधित करने की चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने कथित तौर पर हूतियों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने के लिए तैयार रहने को कहा है। यह जलडमरूमध्य हिंद महासागर को लाल सागर और स्वेज नहर से जोड़कर एशिया-यूरोप व्यापार का मुख्य मार्ग बनाता है।
केयरएज रेटिंग्स की सीनियर डायरेक्टर प्रीति अग्रवाल के अनुसार, "यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर दोनों कुछ सप्ताह के लिए भी बंद होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।" ऐसी स्थिति में जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से भेजना पड़ेगा, जिससे डिलीवरी में 2 से 3 सप्ताह की देरी होगी और परिवहन लागत भी काफी बढ़ जाएगी।
भारतीय कंपनियों पर चौतरफा दबाव
इस स्थिति का असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। केयरएज रेटिंग्स के डायरेक्टर पुनीत कंसल ने बताया कि इससे भारतीय कंपनियों पर नया वित्तीय दबाव बनेगा। कच्चे माल की लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन प्रभावित होगी और कंपनियों के कैश फ्लो पर बुरा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, रूस से तेल खरीद जैसे कदमों से भारत ने अपनी आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित रखी है, लेकिन पश्चिम एशिया के ये नए जोखिम आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।
इनपुट: IANS



