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गुजरात: बिजली परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को अब मिलेगा दोगुना बाज़ार दर से मुआवज़ा, सरकार ने बदली नीति

गुजरात में अब बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि का मुआवज़ा सरकारी 'जंत्री' दर के बजाय ज़मीन की मौजूदा बाज़ार कीमत के आधार पर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने किसानों के

गुजरात: बिजली परियोजनाओं से प्रभावित किसानों को अब मिलेगा दोगुना बाज़ार दर से मुआवज़ा, सरकार ने बदली नीति
(फोटो: IANS)

गुजरात में अब बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों के लिए अधिग्रहित की जाने वाली कृषि भूमि का मुआवज़ा सरकारी 'जंत्री' दर के बजाय ज़मीन की मौजूदा बाज़ार कीमत के आधार पर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए मुआवज़ा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अब प्रभावित किसानों को उनकी ज़मीन के बाज़ार मूल्य का दोगुना मुआवज़ा मिलेगा।

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यह निर्णय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में किसान संगठनों के साथ हुई कई दौर की चर्चा के बाद लिया गया है। किसान लंबे समय से मुआवज़ा निर्धारण के लिए ज़्यादा व्यावहारिक और वास्तविक आधार अपनाने की मांग कर रहे थे, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस प्रक्रिया में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, कृषि मंत्री जीतू वाघानी और ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल भी शामिल रहे।

भुगतान और गणना के नियमों में भी बदलाव

नई नीति के तहत मुआवज़े के भुगतान की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। पहले जहाँ किसानों को किस्तों में भुगतान किया जाता था, वहीं अब पूरी 100 प्रतिशत राशि एकमुश्त दी जाएगी। पहले 40% राशि टावर की नींव बनते समय, 40% टावर खड़ा होने पर और बाकी 20% बिजली के तार बिछने के बाद मिलती थी।

इसके अलावा, बिजली ट्रांसमिशन टावर से प्रभावित भूमि की गणना का तरीका भी बदला गया है। पुरानी नीति में सिर्फ टावर की नींव के वास्तविक क्षेत्रफल पर ही मुआवज़ा मिलता था। अब, टावर के आधार क्षेत्र के चारों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त ज़मीन को भी मुआवज़े के दायरे में शामिल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, 765 केवी लाइन के टावर के लिए अब 625 वर्गमीटर के बजाय 729 वर्गमीटर क्षेत्र पर मुआवज़ा दिया जाएगा।

पारदर्शिता के लिए बनेगी बाज़ार दर समिति

ज़मीन के बाज़ार मूल्य का पारदर्शी और निष्पक्ष निर्धारण सुनिश्चित करने के लिए एक मार्केट रेट कमेटी (MRC) का गठन किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस समिति में प्रभावित किसानों और अधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे।

नई नीति में ट्रांसमिशन लाइन के राइट ऑफ वे (ROW) कॉरिडोर के लिए भी मुआवज़े का प्रावधान है। MRC द्वारा तय बाज़ार मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 30%, नगरपालिका क्षेत्रों में 45% और नगर निगम क्षेत्रों में 60% मुआवज़ा दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों को पुरानी नीति के तहत भुगतान मिल चुका है, लेकिन उनकी परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं, वे भी इस संशोधित नीति का लाभ पाने के हक़दार होंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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