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गुजरात: पोरबंदर में 100 करोड़ की लागत से बनेगा मरीन बायोटेक कॉरिडोर, समुद्री संसाधनों से बदलेगी तस्वीर

गुजरात सरकार ने राज्य के समुद्री जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग कर तटीय क्षेत्रों में तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार अगले पांच…

गुजरात: पोरबंदर में 100 करोड़ की लागत से बनेगा मरीन बायोटेक कॉरिडोर, समुद्री संसाधनों से बदलेगी तस्वीर
(फोटो: IANS)

गुजरात सरकार ने राज्य के समुद्री जैविक संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग कर तटीय क्षेत्रों में तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार अगले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये का निवेश कर पोरबंदर के मोचा गांव में एक विशाल मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (M-BRIC) स्थापित करने जा रही है।

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इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य समुद्री अनुसंधान, बायो-मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और तटीय आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को एक ही मंच पर लाना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) इस पहल का नेतृत्व कर रहा है। इसके लिए GSBTM और CSIR-CSMCRI (केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और कृषि मंत्री जीतु वघानी की मौजूदगी में होगा।

क्या होगा इस कॉरिडोर में?

पोरबंदर जिले का मोचा गांव इस परियोजना का मुख्य केंद्र होगा, जहां 30 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें अनुसंधान केंद्र, औद्योगिक ढांचा, प्रदर्शन क्षेत्र, प्रोसेसिंग यूनिट्स और स्टार्टअप के लिए इनक्यूबेशन सेंटर शामिल हैं। हालांकि इसका मुख्य केंद्र मोचा होगा, लेकिन परियोजना की गतिविधियां पूरे सौराष्ट्र क्षेत्र और गुजरात के तटीय इलाकों तक फैलाई जाएंगी।

कॉरिडोर समुद्री जैव प्रौद्योगिकी के सभी पहलुओं को कवर करेगा, जिसमें समुद्री जैव विविधता की खोज से लेकर वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक विकास, परीक्षण और व्यावसायीकरण तक शामिल है। इसका प्रमुख वैज्ञानिक साझेदार CSIR-CSMCRI को बनाया गया है, जिसे इस क्षेत्र में व्यापक अनुभव है।

किन समुद्री संसाधनों पर होगा फोकस?

परियोजना के तहत समुद्री शैवाल (सीवीड), माइक्रोएल्गी, समुद्री सूक्ष्मजीव और खारे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र जैसे संसाधनों पर काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके उच्च मूल्य वाले उत्पाद बनाना है। इन उत्पादों में शामिल हैं:

  • जैव उर्वरक और बायोस्टिमुलेंट
  • पोषण और सौंदर्य प्रसाधन उत्पाद
  • मछली और पशुओं के लिए पोषण उत्पाद
  • एंजाइम, बायोसर्फैक्टेंट और दवा निर्माण सामग्री

इसके अतिरिक्त, मोचा में एक विशेष सीवीड प्रोसेसिंग क्लस्टर और राज्य स्तरीय सीवीड ब्रूड बैंक भी स्थापित किया जाएगा। वहीं, भावनगर में माइक्रोएल्गी बायोफैक्ट्रियां और एक एकीकृत सीवीड बायोरिफाइनरी बनाने की भी योजना है।

स्थानीय समुदाय और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन

यह परियोजना सिर्फ अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा लाभ स्थानीय समुदायों को भी मिलेगा। इसके तहत तटीय युवाओं, मछुआरों, महिला उद्यमियों और छोटे उद्यमों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे। स्टार्टअप्स और उद्यमियों को अपनी तकनीक को लैब से बाजार तक ले जाने में मदद करने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर, पायलट-स्केल बायोप्रोसेसिंग और विनिर्माण सुविधाएं भी मिलेंगी। यह परियोजना भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' प्राथमिकताओं और 'विकसित भारत 2047' के विजन के अनुरूप है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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