शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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सूरत: ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की ठगी, 6.5 करोड़ के बड़े फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा

गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति से हुई 26.20 लाख रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की जांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सूरत शहर की साइबर क्राइम सेल…

सूरत: ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लाखों की ठगी, 6.5 करोड़ के बड़े फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा
(फोटो: IANS)

गुजरात के सूरत में एक व्यक्ति से हुई 26.20 लाख रुपए की ऑनलाइन धोखाधड़ी की जांच ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सूरत शहर की साइबर क्राइम सेल ने इस मामले में ओडिशा और पश्चिम बंगाल से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि जिस बैंक खाते का इस्तेमाल इस ठगी में हुआ, वह देश भर के 149 अन्य साइबर अपराधों से जुड़ा है और उसमें 6.53 करोड़ रुपए से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ है।

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यह मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहाँ आरोपी शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देते थे। उन्होंने एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजकर पीड़ित को एक खाता बनाने के लिए कहा और फिर शेयर बाजार में निवेश के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 26.20 लाख रुपए जमा करवा लिए। जब पैसा वापस नहीं मिला, तो पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?

साइबर क्राइम सेल ने तकनीकी और वित्तीय जांच के आधार पर आरोपियों का पता लगाया। पुलिस ने ओडिशा के सुंदरगढ़ से रंजन (33), झारसुगुड़ा से कृष्ण कुम्हार (54), और गजपति से सुभाषचंद्र (52) को गिरफ्तार किया। वहीं, पश्चिम बंगाल के पुरबा बर्धमान से एसके आलमगीर (41) और मुर्शिदाबाद से बसंतसिंह (45) को पकड़ा गया, जिसे 'बिग बॉस' के नाम से भी जाना जाता है।

पुलिस के मुताबिक, रंजन और कृष्ण ने मिलकर एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर बैंक में चालू खाता खोला था। इस खाते को उन्होंने कमीशन पर सुभाषचंद्र और आलमगीर को किराए पर दे दिया। इन दोनों ने आगे कमीशन लेकर यह खाता बसंतसिंह को सौंप दिया, जिसने इसे धोखाधड़ी करने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाया। ठगी से मिली रकम को नेट बैंकिंग के जरिए गिरोह के अन्य सदस्यों को ट्रांसफर कर दिया जाता था।

कई राज्यों में फैला था जाल

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 1 मार्च, 2025 और 28 फरवरी, 2026 के बीच इस एक खाते से ही 6.53 करोड़ रुपए से ज़्यादा के संदिग्ध लेनदेन हुए थे। इस मामले में पीड़ित से ठगे गए 26.20 लाख में से 50,000 रुपए इसी खाते से भेजे गए थे। साइबर क्राइम सेल ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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