चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमलों की खबरों के बीच भारत ने कहा- 'टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित'
भारत ने स्पष्ट किया है कि ईरान में उसके द्वारा विकसित किया जा रहा चाबहार पोर्ट हालिया अमेरिकी हवाई हमलों से पूरी तरह अप्रभावित और सुरक्षित है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने इन खबरों पर अपनी…
भारत ने स्पष्ट किया है कि ईरान में उसके द्वारा विकसित किया जा रहा चाबहार पोर्ट हालिया अमेरिकी हवाई हमलों से पूरी तरह अप्रभावित और सुरक्षित है। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने इन खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टर्मिनल को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "जहां तक हमले की बात है, हमने भी ऐसी खबरें देखी हैं, लेकिन हम यह पुष्टि कर सकते हैं कि चाबहार का टर्मिनल किसी भी तरह से क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है।" यह बयान तब आया जब उनसे अमेरिकी सेना द्वारा चाबहार को निशाना बनाए जाने और इसके कामकाज पर पड़ने वाले असर के बारे में सवाल पूछा गया।
प्रतिबंध और भविष्य की राह
जायसवाल ने यह भी उल्लेख किया कि इस बंदरगाह को लेकर अमेरिका द्वारा दी गई छूट कुछ समय पहले समाप्त हो गई थी। उन्होंने कहा, "चाबहार के बारे में अगर आप इस मामले को देख रहे हैं तो पहले अमेरिका की तरफ से एक छूट दी गई थी। वह कुछ समय पहले खत्म हो गई। उसके बाद से हम इस मुद्दे को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में भारत को ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की छूट मिली थी, जो 29 अप्रैल को समाप्त हो गई थी।
ईरान का दृष्टिकोण और भारत की भूमिका
मई महीने में ईरान के तत्कालीन विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चाबहार बंदरगाह को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया था। उन्होंने माना था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसके विकास की गति धीमी हुई है, लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा।
अराघची ने कहा था, "मुझे पूरा भरोसा है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप तक पहुंचने का सुनहरा रास्ता बनेगा।" उन्होंने इस क्षेत्र में शांति और कूटनीति को बढ़ावा देने में भारत की सकारात्मक भूमिका का स्वागत भी किया।
रणनीतिक समझौता
इससे पहले भारत और ईरान ने चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए 10 साल का एक महत्वपूर्ण समझौता किया था। इस समझौते के तहत भारत ने ओमान की खाड़ी में स्थित इस बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 25 करोड़ अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट सुविधा देने का वादा किया था। दोनों देशों की योजना चाबहार को ईरान के 700 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क से जोड़कर जाहेदान शहर तक पहुंचाने की भी है।
इनपुट: IANS



