गुजरात: सभी आदिवासी ICDS ब्लॉक तक पहुंची 'दूध संजीवनी योजना', अब और पौष्टिक दूध मिलेगा
गुजरात सरकार ने राज्य के आदिवासी और दूर-दराज के इलाकों में कुपोषण से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, सरकार ने 'दूध संजीवनी योजना' का दायरा बढ़ाते हुए…
गुजरात सरकार ने राज्य के आदिवासी और दूर-दराज के इलाकों में कुपोषण से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, सरकार ने 'दूध संजीवनी योजना' का दायरा बढ़ाते हुए इसे राज्य के सभी आदिवासी एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) ब्लॉकों में लागू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस विस्तार के साथ ही लाभार्थियों को अब और अधिक फैट वाला पौष्टिक दूध देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है।
इस निर्णय के बाद, अब तक योजना से बाहर रहे 53 आदिवासी ICDS ब्लॉक भी इसके तहत आ गए हैं। सरकार के इस कदम से हजारों नए बच्चे, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इस योजना से जुड़ेंगी, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में पोषण की समान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। यह पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित योजना है।
योजना का नया स्वरूप और हाई-फैट दूध
महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रस्ताव पर अब योजना में दूध की गुणवत्ता का एक नया मानदंड भी जोड़ा गया है। अब तक लाभार्थियों को 1.5 प्रतिशत फैट वाला फोर्टिफाइड दूध दिया जाता था। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अब एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुनिंदा जिलों में ज्यादा फैट वाला दूध दिया जाएगा। इसके तहत नर्मदा, दाहोद और डांग जिलों में 3 प्रतिशत फैट, जबकि वलसाड और साबरकांठा जिलों में 4.5 प्रतिशत फैट वाला दूध उपलब्ध कराया जाएगा। माना जा रहा है कि यह अतिरिक्त फैट बच्चों के शारीरिक विकास और ऊर्जा की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने में मदद करेगा।
एक दशक से भी पुरानी योजना
दूध संजीवनी योजना की शुरुआत 24 दिसंबर, 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 आदिवासी जिलों में एक प्रायोगिक तौर पर की थी। इसके तहत लाभार्थियों को 200 मिलीलीटर फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध दिया जाता है। योजना की सफलता को देखते हुए इसका लगातार विस्तार किया गया। 2014 तक यह 20 जिलों के 106 ICDS घटकों तक पहुंच गई। 2016 में इसमें बनास, अमूल और सुमुल जैसी सहकारी डेयरियों को भी जोड़ा गया, जिससे इसका क्रियान्वयन और प्रभावी हो गया।
पारदर्शिता और बजट
राज्य सरकार ने इस विस्तार के लिए करीब 37.709 करोड़ रुपये और हाई-फैट पायलट प्रोजेक्ट के लिए 0.3035 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होंगी, खरीद GeM पोर्टल से की जाएगी और वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते (DBT) में दी जाएगी। इसके अलावा, समय-समय पर सोशल ऑडिट और थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया गया है।
इनपुट: IANS



