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गुजरात: वलसाड के 46 आदिवासी गांवों तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी, 1331 करोड़ की दमन-गंगा लिफ्ट परियोजना को हरी झंडी

गुजरात के वलसाड जिले के दो आदिवासी तालुकों के हजारों किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या को दूर करने के लिए 1,331.30 करोड़ रुपये की…

गुजरात: वलसाड के 46 आदिवासी गांवों तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी, 1331 करोड़ की दमन-गंगा लिफ्ट परियोजना को हरी झंडी
(फोटो: IANS)

गुजरात के वलसाड जिले के दो आदिवासी तालुकों के हजारों किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या को दूर करने के लिए 1,331.30 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी दमन-गंगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना से कपराडा और धरमपुर के 46 गांवों की 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा।

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इन पहाड़ी क्षेत्रों में मधुबन जलाशय पास होने के बावजूद किसान सिंचाई के लिए भूजल पर अत्यधिक निर्भर थे। इसकी वजह यह थी कि ये गांव ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां पारंपरिक नहरों का पानी गुरुत्वाकर्षण के कारण नहीं पहुंच पाता। इस निर्भरता के चलते यहां किसान एक से अधिक फसल लेने में असमर्थ थे। अब इस लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से मधुबन जलाशय का पानी ऊपर उठाकर इन इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

कैसे काम करेगी यह लिफ्ट सिंचाई परियोजना?

इस परियोजना के लिए राज्य के नर्मदा जल संसाधन, जल आपूर्ति और कल्पसर विभाग ने कई विकल्पों का मूल्यांकन करने के बाद एक विस्तृत योजना तैयार की है। इसके तहत लगभग 53 किलोमीटर की मुख्य पाइपलाइन और 188 किलोमीटर से अधिक की शाखा पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी।

इस प्रणाली के ज़रिए पानी को समुद्र तल से 65 मीटर से लेकर 382 मीटर तक की ऊंचाई पर पहुंचाया जाएगा। इसके लिए तीन पंपिंग स्टेशन बनेंगे, जिनकी संयुक्त क्षमता 56,400 किलोवाट (75,600 हॉर्सपावर) होगी। पहला पंपिंग स्टेशन मधुबन बांध के पास फतेहपुरा गांव में, जबकि अन्य दो बुरवाद और किस्टोनिया के पास बनाए जाएंगे। कपराडा गांव के पास एक ब्रेक प्रेशर टैंक भी बनाया जाएगा जो ऊंचाई पर दबाव को नियंत्रित करेगा।

पानी का वितरण और प्रबंधन

परियोजना की कुल आपूर्ति क्षमता 500 क्यूसेक होगी। यह पानी सीधे खेतों में न भेजकर 26 गांव के तालाबों और 81 चेक डैम में छोड़ा जाएगा, जिससे भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, बारुमल गांव के पास कांगवी नदी में 1.5 क्यूसेक पानी भी छोड़ा जाएगा।

योजना को दो क्षेत्रों में बांटा गया है। क्षेत्र 1 में कपराडा तालुका के 28 गांव आएंगे, जबकि क्षेत्र 2 में कपराडा और धरमपुर के 17 गांव शामिल होंगे। जलवैज्ञानिक आकलन के अनुसार, मधुबन जलाशय में पर्याप्त पानी है और इस परियोजना से मौजूदा घरेलू आवंटन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पूरी प्रणाली की निगरानी और पाइपलाइन के दबाव को प्रबंधित करने के लिए एक केंद्रीय एससीडीए (SCADA) प्रणाली भी स्थापित की जाएगी। एक बार चालू हो जाने पर, इस योजना से आदिवासी क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा मिलने और भूजल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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