कोलकाता पुलिस: सरकारी क्लर्क पर 4 साल में 51 लाख रुपये के गबन का आरोप, फर्जी बिल बनाकर मां के खाते में भेजता था पैसा
कोलकाता पुलिस के ही एक कार्यालय में एक अपर डिवीजन असिस्टेंट (UDA) पर चार वर्षों के दौरान 51 लाख रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी प
कोलकाता पुलिस के ही एक कार्यालय में एक अपर डिवीजन असिस्टेंट (UDA) पर चार वर्षों के दौरान 51 लाख रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी पुलकेंदु घोष को फर्जी बिलों के जरिए इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। वह कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (पूर्वी डिवीजन) के दफ्तर में तैनात था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी कि आरोपी ने यह राशि कथित तौर पर अपने और अपनी मां के बैंक खातों में स्थानांतरित की थी। प्रारंभिक जांच के बाद कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) के आदेश पर पूर्वी कोलकाता के आनंदपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई, जिसके आधार पर रविवार को घोष की गिरफ्तारी हुई।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
पुलिस ने बताया कि सरकार बदलने के बाद लालबाजार को इस वित्तीय अनियमितता की शिकायत मिली थी। इसके बाद पिछले महीने संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) ने मामले की जांच के आदेश दिए। उपायुक्त (पूर्वी डिवीजन) के निर्देश पर 15 जून से 30 जून के बीच पुलिस की एक टीम ने गहन जांच की, जिसमें यह पूरा मामला सामने आया।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि घोष ने साल 2022 से 2026 के बीच कुल 112 फर्जी बिल तैयार किए। इनमें से 88 बिलों के जरिए लगभग 40 लाख रुपये उसने अपने खाते में जमा कराए, जबकि बाकी 24 बिलों से 10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम अपनी मां के बैंक खाते में भेजी।
फर्जीवाड़े का तरीका
आरोपी पुलकेंदु घोष की जिम्मेदारी ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के बिल तैयार करने की थी। पुलिस के मुताबिक, उसने इसी पद का फायदा उठाया। आरोप है कि उसने HRMS सिस्टम से असली ठेकेदारों और सप्लायर्स के बैंक खातों का विवरण हटा दिया और उनकी जगह अपने व अपनी मां के बैंक खाते की जानकारी डाल दी। इस काम के लिए उसने फर्जी दस्तावेजों और जाली मुहरों का भी इस्तेमाल किया।
जांच के दौरान जब चार ठेका कंपनियों के प्रतिनिधियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें कभी उनका भुगतान मिला ही नहीं। बाद में सत्यापन करने पर पता चला कि यह पैसा घोष और उसकी मां के खातों में जमा किया गया था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दफ्तर में वरिष्ठ पद पर होने के कारण सहकर्मी उस पर शक नहीं करते थे। पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
इनपुट: IANS



