शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा: वैश्विक संगठनों ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को पत्र लिख जताई चिंता

दुनिया भर के कई प्रमुख प्रेस स्वतंत्रता संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए बिगड़ते माहौल पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन…

पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरा: वैश्विक संगठनों ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को पत्र लिख जताई चिंता
(फोटो: IANS)

दुनिया भर के कई प्रमुख प्रेस स्वतंत्रता संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए बिगड़ते माहौल पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन संगठनों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को एक संयुक्त पत्र लिखकर देश में स्वतंत्र पत्रकारिता पर बढ़ते खतरों को लेकर आगाह किया है।

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पत्र में कहा गया है कि हाल के महीनों में पत्रकारों पर प्रतिबंध और सरकारी कार्रवाई की घटनाओं में तेज़ी आई है, जिससे उनकी स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से रिपोर्टिंग करने की क्षमता कमज़ोर हुई है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि ये घटनाक्रम स्वतंत्र पत्रकारिता की नींव को कमज़ोर कर रहे हैं।

पत्रकारों के खिलाफ़ कार्रवाई और दबाव

पत्र में पाकिस्तान में पत्रकारों के सामने आने वाली कई चुनौतियों का ज़िक्र किया गया है। इनमें कई पत्रकारों का लापता होना, उन्हें हिरासत में लिया जाना, उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करना और देश के कुछ हिस्सों में रिपोर्टिंग से रोकना शामिल है। कई मामलों में सरकारी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दबाव के कारण पत्रकारों को अपनी नौकरी तक गंवानी पड़ी है।

संगठनों ने विशेष रूप से 'इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम, 2016' (PECA) के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) इस कानून का इस्तेमाल जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ जांच करने के लिए कर रही है। पत्र में कहा गया, "सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने या कथित झूठी सूचनाओं को रोकने जैसे कारण सार्वजनिक हित की रिपोर्टिंग को दबाने का खुला आधार नहीं बन सकते।"

लापता पत्रकार और सरकारी प्रतिबंध

मानवाधिकार समूहों ने 1 अगस्त से कथित तौर पर हिरासत में लिए गए दो स्वतंत्र पत्रकारों, राजी ताहिर और मुहम्मद सैफ की तत्काल रिहाई की मांग की है। संगठनों के अनुसार, दोनों को एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है और इस्लामाबाद पुलिस ने उनकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसके अलावा, पत्र में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में रिपोर्टिंग पर लगाए गए प्रतिबंधों, इंटरनेट सेवाओं को बंद करने और प्रसारण संस्थानों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की भी आलोचना की गई है। 'फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026' को "कठोर" बताते हुए कहा गया कि इसके तहत अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पत्रकारों को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर रिपोर्टिंग के लिए सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

संगठनों की प्रमुख मांगें

पत्र में पाकिस्तानी सरकार से कई ठोस कदम उठाने की अपील की गई है। इनमें हिरासत में लिए गए पत्रकारों को रिहा करना, उनके लापता होने की स्वतंत्र जांच कराना और गैरकानूनी हिरासत के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना शामिल है। संगठनों ने यह भी मांग की कि सरकार 'फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026' को वापस ले और पत्रकारिता को अपराध बताने के लिए कानूनों का दुरुपयोग बंद करे।

इनपुट: IANS

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