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देहरादून: 16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं चला, बारिश में सड़क धंसने पर उठे गंभीर सवाल

देहरादून में महज़ कुछ दिन पहले जनता के लिए खोला गया एक नया पुल पहली ही भारी बारिश नहीं झेल सका। प्रेमनगर में टोंस नदी पर बने इस पुल की संपर्क सड़क (एप्रोच रोड) का एक बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे…

देहरादून: 16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं चला, बारिश में सड़क धंसने पर उठे गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

देहरादून में महज़ कुछ दिन पहले जनता के लिए खोला गया एक नया पुल पहली ही भारी बारिश नहीं झेल सका। प्रेमनगर में टोंस नदी पर बने इस पुल की संपर्क सड़क (एप्रोच रोड) का एक बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे यातायात ठप हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने 16 करोड़ रुपये की लागत वाले इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

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यह घटना प्रेमनगर के नंदा की चौकी के पास बने पुल पर रात भर हुई मूसलाधार बारिश के बाद हुई। लगातार बारिश के कारण पुल को जोड़ने वाली सड़क पर एक विशाल गड्ढा बन गया, जिसके चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है। स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पुल का निर्माण मॉनसून की भीषण बारिश को ध्यान में रखकर नहीं किया गया।

प्रशासन का दावा- पुल सुरक्षित, मरम्मत जारी

मामले को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि पुल के मुख्य ढांचे को कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि केवल संपर्क सड़क क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी मरम्मत का काम तुरंत शुरू कर दिया गया है। उन्होंने IANS को बताया, "पुल पूरी तरह सुरक्षित है। पुल तक जाने वाली सड़क को नुकसान पहुंचा है। सभी मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मरम्मत कार्य की निगरानी कर रहे हैं।"

विपक्ष और स्थानीय लोगों ने सरकार को घेरा

इस घटना के बाद कांग्रेस ने संग्राम सिंह पुंडीर के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण में "गंभीर लापरवाही" का आरोप लगाया। पुंडीर ने सवाल उठाया कि 16 करोड़ की लागत से बना पुल सिर्फ 16 दिनों में कैसे क्षतिग्रस्त हो सकता है। उन्होंने कहा, "भले ही जिलाधिकारी इसे छोटा नुकसान बता रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि इस रास्ते पर आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई है।" उन्होंने पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज से जवाबदेही की मांग करते हुए ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सीबीआई जांच की मांग की।

स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन के दावों पर अविश्वास जताया है। एक निवासी ने कहा कि यह पुल कई स्कूलों और कॉलेजों के लिए मुख्य संपर्क मार्ग था और अब लोग दोनों तरफ फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इसी टोंस नदी पर बने दूसरे पुल 20 सालों से सुरक्षित हैं, तो यह नया पुल 16 दिन भी क्यों नहीं टिक पाया? लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार ठेकेदार और एजेंसी पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तराखंड डेस्क

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