अभिषेक बनर्जी के 'सेबाश्रय' स्वास्थ्य शिविर पर फिर उठे गंभीर सवाल, गलत इलाज से महिला का पैर कटने का आरोप
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहल 'सेबाश्रय' एक बार फिर विवादों में है। दक्षिण 24 परगना जिले की एक महिला ने आरोप लगाया है कि शिविर में ह
तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहल 'सेबाश्रय' एक बार फिर विवादों में है। दक्षिण 24 परगना जिले की एक महिला ने आरोप लगाया है कि शिविर में हुए गलत इलाज के कारण उन्हें अपनी एक टांग गंवानी पड़ी, जिसके बाद बनर्जी समेत 10 अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में नई शिकायत दर्ज की गई है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला महेशतला निवासी मालती बिस्वास से जुड़ा है। उन्होंने डायमंड हार्बर पुलिस जिले के रवींद्रनगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि वह घुटने के दर्द का इलाज कराने 'सेबाश्रय' के एक मुफ्त स्वास्थ्य शिविर में गई थीं। वहां डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएं दीं, लेकिन उनकी तकलीफ कम होने के बजाय और बढ़ गई।
शिकायत में इलाज का सिलसिलेवार ब्यौरा
अपनी शिकायत में मालती ने बताया कि जब उनकी हालत बिगड़ी तो वह दोबारा उसी शिविर में गईं। इस बार उन्हें कोलकाता के एम. आर. बांगुर अस्पताल भेज दिया गया। वहां के डॉक्टरों ने उन्हें सूचित किया कि गलत दवाओं के कारण उनके घुटने की स्थिति गंभीर हो गई है। इसके बाद उन्हें नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां स्थिति और बिगड़ने पर डॉक्टरों को उनकी दाहिनी टांग काटनी पड़ी।
बिस्वास का आरोप है कि जब उन्होंने इस गंभीर लापरवाही पर 'सेबाश्रय' के अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा, तो उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अभिषेक बनर्जी से संपर्क करने के उनके कई प्रयास भी नाकाम रहे।
पहले भी लग चुके हैं कई आरोप
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से 'सेबाश्रय' के खिलाफ यह 17वीं शिकायत है। पुलिस ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इन शिकायतों में चिकित्सकीय लापरवाही और गलत इलाज के अलावा कई अन्य गंभीर आरोप भी शामिल हैं।
कुछ शिकायतों में राज्य स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना शिविर चलाने, अयोग्य डॉक्टरों की नियुक्ति करने और यहां तक कि एक्सपायरी डेट वाली दवाएं बांटने के भी आरोप लगाए गए हैं। हाल ही में, स्थानीय भाजपा नेता अभिजीत दास ने एक ऐसा पर्चा भी सार्वजनिक किया था, जिसमें दवा लिखने वाले डॉक्टर का मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबर ही नहीं था।
इनपुट: IANS



